नमस्कार . पलक झपकने के पहले ही हम इस साल के दूसरे महीने में पहुँच गए हैं।
फ़रवरी का महीना अपने आप में बड़ा दिलचस्प है। एक तरफ़ 12 फ़रवरी को जन्मे चार्ल्स डार्विन, जिनकी एक लाइन ने पूरी दुनिया की सोच बदल दी— Survival of the fittest। और दूसरी तरफ़ 14 फ़रवरी, यानी Valentine’s Day, जो प्रेम, रिश्तों और भावनाओं का प्रतीक बन चुका है। पहली नज़र में विज्ञान और रोमांस दो अलग-अलग दुनिया लगती हैं, लेकिन अगर गहराई से देखें तो दोनों एक ही बात कह रहे हैं— जो समय के साथ खुद को ढाल लेता है, वही टिकता है।
डार्विन ने बाद में साफ़ किया था कि यह “सबसे ताक़तवर” की नहीं, बल्कि सबसे adaptable की जीत होती है। यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है। प्रेम केवल आकर्षण से शुरू हो सकता है, लेकिन टिकता वही है जो बदलती ज़रूरतों, परिस्थितियों और अपेक्षाओं के साथ खुद को अपडेट करता रहता है।
कोविड ने हमें यह सबक बहुत साफ़ तरीके से सिखाया। जिन लोगों, रिश्तों और संस्थाओं ने बदलाव को स्वीकार किया, वही आगे बढ़े। जो अड़ गए—“हम तो ऐसे ही हैं”—वे पीछे छूट गए। आज का प्रेम भी यही सवाल पूछता है— क्या आप अभी भी relevant हैं?
रिश्तों में relevance क्यों ज़रूरी है?
आज की दुनिया तेज़ है। काम के तरीके बदले हैं, संवाद के माध्यम बदले हैं, प्राथमिकताएँ बदली हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से वहीं अटका है जहाँ वह दस साल पहले था, तो रिश्ता दम घुटने लगता है। प्रेम में बने रहने के लिए केवल “मैं तुम्हें चाहता हूँ” कहना काफ़ी नहीं, बल्कि यह दिखाना ज़रूरी है कि मैं आज भी तुम्हारी ज़िंदगी में उपयोगी हूँ, समझदार हूँ और साथ चल सकता हूँ।
आज के समय में relevant रहने के 4 सूत्र
1. सीखते रहिए, उम्र नहीं पूछती
जो सीखना बंद कर देता है, वह धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो जाता है। नई टेक्नोलॉजी, नए विचार, नई सोच—इनसे डरने के बजाय इन्हें अपनाइए। चाहे डिजिटल पेमेंट हो, ऑनलाइन मीटिंग या मानसिक स्वास्थ्य की समझ—सीखना आपको सिर्फ़ प्रोफेशनल नहीं, बल्कि एक बेहतर साथी भी बनाता है।
2. सुनना सीखिए, सिर्फ़ बोलना नहीं
आज की सबसे बड़ी emotional skill है— active listening। पार्टनर क्या महसूस कर रहा है, किस दौर से गुज़र रहा है, यह समझना बहुत ज़रूरी है। पुराने ज़माने की तरह “मैं सब जानता हूँ” वाला रवैया अब रिश्तों को तोड़ देता है। relevance का मतलब है— सामने वाले की वर्तमान ज़रूरत को समझना।
3. लचीलापन रखिए, जिद नहीं
कोविड ने सिखाया कि प्लान A हमेशा काम नहीं करता। रिश्तों में भी यही सच है। अगर परिस्थितियाँ बदल रही हैं तो रोल्स भी बदलेंगे। कभी आपको ज़्यादा देने वाला बनना होगा, कभी सहारा लेने वाला। जो व्यक्ति हर हाल में rigid रहता है, वह अकेला पड़ जाता है।
4. खुद को neglect मत कीजिए
जो खुद को emotionally, physically और mentally fit रखता है, वही दूसरों के लिए भी attractive और dependable बनता है। Self-care कोई selfish काम नहीं, बल्कि long-term relationship investment है।
इस Valentine’s Day पर केवल गुलाब और चॉकलेट ही नहीं, यह सवाल भी पूछिए— क्या मैं अपने रिश्ते में आज भी relevant हूँ?
और अगर जवाब पूरी तरह “हाँ” नहीं है, तो घबराइए मत। डार्विन भी यही कहेंगे— बदलाव ही जीवन है।
याद रखिए, प्रेम की दुनिया में वही survives करता है जो समय के साथ evolve करता है।
Strong बनिए, लेकिन उससे भी ज़्यादा adaptable।