गुरुवार, 30 मई 2024

नमस्कार। पलक झपकने से पहले आधा साल गुजर गया। हम जून के महीने में पहुँच गए हैं। इस साल लोकसभा चुनाव के वजह से यह महीना और भी महत्वपूर्ण बन गया है। कई उम्मीदवार खुश होंगे। खुश निराश। वोट के परिणाम से। लोकसभा चुनाव हर पाँच साल में होते हैं। परन्तु विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाता है हम सबको अपनी जिम्मेवारी का याद दिलाने अपने वातावरण के प्रति। लेकिन हम वातावरण के विषय में क्या करते हैं ? शायद कुछ नहीं। 

विशेषज्ञ रिसर्च के माध्यम से कई सारे आँकड़े पेश कर रहें हैं और चेतावनी दे रहें हैं कि अपने भविष्य के पीढ़ी के लिए एक ऐसा दुनिया छोड़ के जायेंगे जहाँ पर उनको काफी कठिनाईओं का सामना करना पड़ेगा। फिर हमें जरूर कुछ करना चाहिए इस विषय में। 

मैं समझता हूँ कि इस चेतावनी को हमें सीरियसली लेना चाहिए और इसके लिए जो भी संभव है करना चाहिए। इसकी शुरुआत होनी चाहिए अपने घर से। हम अपने घर में कैसा वातावरण बनाए हैं अपनों के लिए। क्या हमारे परिवार के सदस्य खुश हैं ? क्या वह अपना विचार और सोच निडरता के साथ व्यक्त कर सकते हैं ? क्या वह आपकी दी हुई सलाह को स्वीकार करेंगे। अगर आपके परिवार में वातावरण ख़ुशी का है तब आप यह चुनौती के लिए तैयार हैं -अपना और अपने परिवार का कर्तव्य निभाने के लिए जो कि विश्व पर्यावरण दिवस के माध्यम से हम सबको बताया जा रहा है। 

हमें जीने के लिए ऑक्सीजन जरूरी है। हम सब यह जानते हैँ। दूसरी महत्वपूर्ण आवश्यकता है पीने का पानी। वायु और पानी के बिना हम जी नहीं सकते। फिर हमें इन दोनों को भविष्य के पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना हमारा कर्त्तव्य बनता है। मामला परन्तु संगीन होता जा रहा है। UNICEF का रिसर्च कह है कि दुनिया की दो तिहाई जनसँख्या हर साल एक महीने के लिए भीषण क्राइसिस का सामना करती है पानी ना मिलने के कारन। शायद हम और आप ऐसी कठिनाई का सामना नहीं कर रहें हैं। हम खुश किस्मत है। परन्तु अगला आँकड़ा और भी गंभीर है। 2025 , जी हाँ अगले साल तक दुनिया की आधी जनसँख्या किसी ना किसी तरह का समस्या का सम्मुखीन होगा पानी के अभाव के कारन। और 2040 तक 25 प्रतिशत बच्चे पानी ना मिलने का भयंकर  क्राइसिस का सामना करेंगे। 

इन आंकड़ों को जानने के बाद क्या हमारी जिम्मेवारी बनती है कि हम पानी का संग्रक्षण को अपना कर्तव्य बना लें। हर इंसान अगर पानी बचाएगा तो किसी ना किसी को पानी मिलेगा जिसको पानी आसानी से नहीं मिलता है। पानी के बचत को प्रोत्साहित करने के लिए विदेश में आपको नल का पानी खरीदना परता। जितना आप पानी इस्तेमाल करेंगे उतना आपको पैसा देना पड़ेगा। सोचिये अगर यह नियम हमारे देश में लागू हो जाय तो क्या होगा। हम जो पानी का मूल्य ना समझ कर पानी का नल खुला छोड़ देते हैं , कपड़े धोने के लिए अत्यधिक पानी का इस्तेमाल करते हैं ,इन सब पर हम और सावधानी बरतेंगे। 

इस विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मेरी आपसे केवल एक विनती है। सोच लीजिये कि विदेश के तरह हमारे घर में जो पानी मिलता है उस पर मीटर लग गया है -जैसा कि अभी हमारे घर में बिजली का मीटर लगा हुआ है। जैसे की हम बिजली का बिल कम रखने के लिए बिजली बचाने का सक्रिय प्रयास करते हैं खुद और परिवार के अन्य सदस्योँ को प्रोत्साहित करतें हैं बिजली बचाने के लिए और जरूरत होने पर डांटते भी हैं ,वही हमेँ पानी के बचत के लिए करना पड़ेगा। क्या आप हमसे सहमत हैं ? क्या आप इस योगदान के लिए तैयार हैं ? कहीं भी कोई शंका हो तो याद रखियेगा बच्चोँ के भविष्यत का। 

 

गुरुवार, 2 मई 2024

नमस्कार। मई महीने के भीषण गर्मी में आपका स्वागत। पूरी देश में ऐसी गर्मी बहुत सालों के बाद हम सबको सावधान रहने का आह्वान कर रही है। थोड़ी सी चूक के कारण हम बीमार पर सकते हैं। असल में किसी भी चीज़ का अत्याधिक परिमाण हानिकारक होता है। 

इस सन्दर्भ में अंतर्राष्ट्रीय लेबर दिवस का , जो कि हर साल मई महीने के पहले दिन पर पूरी दुनिया में मनाया जाता है, जिक्र करना आवश्यक है। इतिहास बताता है कि १ मई १८८६ में अमेरिका में फैक्ट्री के लेबर ने दिन में आठ घंटे के काम के माँग में हड़ताल किया था।  तब से पहले मई के दिन को अंतर्राष्ट्रीय लेबर दिवस के हैसियत से मनाया जाता है। इन कर्मचारियों ने शोषण के विरुद्ध और अपने अधिकार के लिए यह आंदोलन किया था। 

 यही शोषण और अधिकार के विषय में आज का लेख आपके लिए। आपके घर में अगर कोई नौकर काम करता है ,आप उनके अधिकार और कितने घंटे काम करते हैं उसके विषय में कितना ख्याल रखते हैं। मैंने ऐसे परिवार देखें हैं जहाँ घर का नौकर सुबह पाँच बजे से रात के बारह बजे तक ,बिना किसी विश्राम के काम करता है। ऐसे के परिवार को मैंने पूछा था कि ऐसा क्यों होता है। जवाब में मुझे दो बातें बताई गई। छोटू (नौकर का नाम ) एकदम बचपन में अनाथ हो गया था। इस परिवार ने उसे रहने का जगह दिया। और जब से वह काम करने लायक हो गया , नौकर बन गया। अभी सुबह दादी माँ की सेवा और मदत करता है और रात बारह बजे तक बड़े भैया के घर आने का इंतेज़ार करता है। मजे की बात यह है कि छोटू खुश है। वह इस बात का आभारी है कि इस परिवार ने उसको रोटी ,कपड़ा और छत दिया जब उसे ज़रुरत थी। चूँकि उसका कोई परिवार और रिश्तेदार नहीं है , वह घर जाने के लिए छुट्टी भी नहीं लेता है। वह इस परिवार के प्रति वफादार है। और इसी कारण वह शोषित है। यह परिवार उसको करीब १९ घंटे हर दिन काम करवाती है और यह नहीं महसूस करती है कि वह छोटू का शोषण कर रही है। यह  उनका अधिकार बनता है क्यूँकि छोटू को ऐसे काम करने में कोई आपत्ति नहीं है। मुझे इस विषय में इससे अधिक पूछताछ करने से साफ मना कर दिया गया। 

दूसरी बात मुझे याद है जिस दिन मैं शादी करने जा रहा था। बारात निकलने वाली थी और मैंने देखा कि मेरी माँ और मेरी एक चाची गभीर वार्तालाप में जूझे हुए थे। रूम के बाहर से यह समझ में आ रहा था कि माँ को चाची के साथ किसी विषय पर मतभेद हो रहा था। बारात को देर ना हो जाय यह सोच कर दोनों रूम से बाहर आए और हमने उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और शादी करने के लिए रवाना हो गए। शादी के कई दिनों बाद मैंने माँ से उस दिन का जिक्र किया और पूछा कि क्या हो रहा था। माँ ने कहा वह एक परंपरा के ख़िलाफ़ प्रतिवाद कर रही थी। प्रथा के अनुसार बारात के साथ निकलने के पहले मुझे माँ के गोद में बैठना था और माँ मुझे बोलेगी "जा बेटा शादी करके मेरे लिए दासी ले कर आ "-मेरी माँ ने इस प्रथा को करने से इंकार किया जिसके कारण वह चाची के साथ बहस कर रही थी। कहीं हमारे रीती ,रिवाज़ और परंपरा प्राचीन ख्यालों में पराधीन है जिसके कारण ऐसे शोषण को एक सामाजिक प्रोत्साहन मिल जाता है। और इसी के कारण साँस भी कभी बहु थी इतना चर्चित और पॉपुलर सीरियल हुआ करती थी। 

आपसे हमारी एक ही विनती है। दिल पर हाथ रख कर पूछिए। क्या आप जाने या अनजाने में किसी का शोषण कर रहे हैं ? शोषण शारीरिक या मानसिक या दोनों हो सकता है। अगर ऐसा लगे तो ऐसा मत कीजिए। हमारे वीर स्वाधीनता संग्रामी ने हमें अंग्रेज़ो के शोषण से आज़ादी दिलवाई है। उसका सम्मान कीजिये। क्योंकि कोई भी इंसान शोषण पसंद नहीं करता है। आप भी नहीं। 

सावधान रहिए और गर्मी से जूझने की सतर्कता आजमाइए। फिर मिलेंगे। 


शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024

नमस्कार। आप सब को वित्तीय नए साल के लिए मुबारक। व्यवसाय ,नौकरी ,स्कूल ,कॉलेज सब के लिए नई शुरुआत। अप्रैल का महीना। एक ऐसा महीना जो शुरू होता है अपने ही अंदाज़ में -इस महीने का पहला दिन अप्रैल fools का दिन होता है। यह प्रथा कब से शुरू हुआ है। मैंने रिसर्च किया। पता चला कोई निश्चित शुरुआत का इतिहास नहीं है। परन्तु यह प्रथा १७वीं शताब्दी से प्रचलित है। यह एक हल्का फुल्का मज़ाक और मस्ती का प्रयास है अपनों के साथ। आनंद लेना है बिना दिल को ठेस पहुँचाकर। आपने क्या किसी को पहले अप्रैल के दिन किसी को fool बनाया है। कैसा रहा आपका तजुर्बा। 

परन्तु अब हमें fools बनने से सतर्क रहना पड़ेगा। आपने जरूर सुना और पढ़ा होगा कैसे लोग तरह तरह के धोके का शिकार बन रहें हैं। मेरे एक अभिन्न मित्र को मेसेज और कॉल आया कि उसने अपने बिजली की बिल का पेमेंट नहीं किया है। अगर अगले एक घंटे में पे नहीं करेगा तो बिजली की लाइन कट कर दिया जायेगा और उसको फिर से चालू करने के लिए बहुत पैसे लगेंगे और पाँच से सात दिन का समय लगेगा। सोचिए आज के ज़माने में पाँच से सात दिन बिना बिजली का बिताना। मेरे दोस्त ने भेजे हुए लिंक के जरिए पे करने की कोशिश की। करीब दो लाख रुपये उनके बैंक एकाउंट से निकल गया। करीब छः महीने गुज़र गए हैं। अभी भी पैसा वापस नहीं मिला है। इस उदाहरण से हम क्या सीख सकते हैं। जो ऐसा धांधली कर रहें हैं , उनके पास हमारे कई डिटेल्स हैं। इनका तकनीक है कि सोचने का समय ना देकर एक डर पैदा करना जो कि हम नहीं चाहते हैं। ऐसे समय पर फ़ोन करो जब कि इंसान ऐसे किसी काम में उलझा हो कि उसके पास समय ज़्यादा नहीं है सोचने का या पूछताछ करने का। जैसा की मेरे दोस्त के साथ हुआ। जो कि एक बड़ी कंपनी में एक महत्वपूर्ण जिम्मेवारी वाले पोजीशन पर है। मेरे मित्र ने मुझे यह बताया कि उन्होंने बिल पे किया था और उनको संदेह हुआ।  परन्तु  उसने आप के वजाय उस फ़ोन करने वाले के बातों पर विश्वास किया। सबसे बड़ी गलती जो उन्होंने की -बिजली के लाइन के कट जाने के धमकी से डर गया। और यहीं पर उसने सबसे बड़ी गलती कर दी। आज के ज़माने में कोई भी सर्विस प्रोवाइडर अपने वेबसाइट पर लिख देता है अपने टर्म्स और कंडीशंस ऐसे परिस्थितिओं के लिए। जैसे कि अगर आप समय पर बिजली का बिल ना भरो तो जुर्माना क्या है। अगर यह जानकारी मेरे दोस्त के पास होती तब वह fool नहीं बनता। आप सबसे निवेदन है कि जो भी सर्विस का आप ग्राहक हो उनका टर्म्स एंड कंडीशंस ध्यान से पढ़ो और समझो। 

इसके अलावा मेरा विश्लेषण इस  निष्कर्ष पर पहुँचा है कि अधिक से अधिक लोग जो कि fool बनाए गए हैं ,अपने लालच का शिकार हैं। आपको एक लिंक मिला कि आपको एक लौटरी लगी है एक करोड़ रुपये का। बस क्लिक कीजिये और अपने बैंक एकाउंट का डिटेल्स दीजिए पैसा आपके एकाउंट में आ जायेगा। यह आपको लिंक मिलने के आधे घंटे के अंदर करना है नहीं तो किसी और को लौटरी लग जायेगा। बस आप लिंक पर क्लिक करो और आपका बैंक एकाउंट खाली हो जाएगा। 

मुझे कभी -कभी फ़ोन मिलता है कि मेरा एक पुराना इन्शुरन्स पॉलिसी में काफी पैसा जमा हो गया है। जो कि न उठाने पर फिर कभी नहीं मिलेगा। अगर मैं अपना बैंक एकाउंट का डिटेल्स दूँ तो पैसे मुझे मिल जाएंगे। जरा सोचिये अगर पैसा मेरा है तब किसी भी नियम के अधीन उसे कोई नहीं ले सकता है। ऐसी जानकारी हमें मदत करती है fool नहीं बनने से। 

एक और उदाहरण देखिये। कई गरीब लोग जल्दी ,ज़्यादा पैसा कमाने के लिए चिट फंड में अपना पैसा निवेष करते हैं। कुछ महीनों में पैसा दुगना हो जाएगा इस आश्वासन के कारण। शुरू में जब उनका निवेष थोड़ा होता ,तब उनको दुगना पैसा वापस मिलता है। यह एक तरीका है लालच को प्रोत्साहित करने का। फिर एक समय आता है जब पूरा पैसा डूब जाता है। ऐसा धाँधली हर राज्य में होता है। यह भी जानकारी के अभाव के लिए होता है। कोई भी अगर दस से बारह प्रतिशत से ज़्यादा बढ़त का वादा करता है तो सावधान रहिये। जितना कम समय में आपके पैसों को बढ़ाने का आश्वाशन दे ,उतना ही सतर्क हो जाइए। 

दुनिया जितना डिजिटल बन जाएगी उतना ही ऐसे क्राइम बढ़ेंगे। बुजुर्गों का मदत कीजिए। उनको ज़्यादा टारगेट करते हैं ऐसे धोकेबाज। लालच और डर के फंदे में पैर ना रखिये। जानकारी बढ़ाइए इनसे दूर रहने के लिए। ताकि आपको कोई fool ना बना सके। 

इस साल गर्मी का पूर्वाभास अच्छा नहीं है। सावधान रहिये। अपना और अपनों का ख्याल रखिये। फिर मिलेंगे अगले महीने। 

शुक्रवार, 1 मार्च 2024

नमस्कार। होली के महीने में आप सब का स्वागत। वित्तीय वर्ष का आखिरी महीना। टैक्स प्लैनिंग का महीना। कई वयवसाय के लिए वाणिज्य का सबसे उम्दा महीना। विद्यार्थी के लिए परीक्षा का समय। नौकरी करने वाले के लिए वार्षिक परफॉरमेंस का समय। बहुत ही व्यस्त महीना। हर किसी के लिए। दो किस्म का प्लॅनिंग चलता है। वर्ष को धमाके के साथ समाप्त करने का। और नए साल का तगड़ा शुरुआत करने की प्रस्तुति। 

मैं समझता हूँ कि मार्च का महीना आगे के बारह महीनों के प्लानिंग में इस्तेमाल करना चाहिए। किस तरह का प्लॅनिंग। मन ,धन, चैन ,प्रगति और स्वास्थ का। शायद आप हमसे सहमत होंगे अगर मैं यह कहूँ कि इन्सान का मन ही इंसान का सबसे बड़ा मित्र और सबसे कठिन शत्रु होता है। हम अपने मन को खुश रखे तो ज़िन्दगी और आसान एवं आनंदमय बन जाता है। थोड़ा सोचिये और खुद के साथ बातचीत कीजिये। गत बारह महीनें में आपके ख़ुशी के क्षण और उनकी वजह और उदासी के पल और उदासी के कारन। मैंने अपने लिए यह विश्लेषण किया है। और दो -तीन बातें मेरे सामने उभर कर सामने आई है। पहली बात बहुत सारे उदासी का कारन मैं खुद हूँ। मैं दूसरे के तरक्की पर उदास हूँ। क्योँ। क्योंकि मुझे लगता है वह इंसान उस तरक्की के काबिल नहीं है। वह लकी या खुश किसमत है। मैं कौन होता हूँ इस निष्कर्ष  पर पहुँचने का। इस वित्तीय वर्ष में हमारी वार्षिक आय उम्मीद से काफी कम रही। इस वजह से मैं उदास हूँ। परन्तु जब मैंने अपने जैसे औरों से बातचीत की तब मुझे यह महसूस हुआ कि मैंने औरों की अपेक्षा बेहतर किया है। थोड़ी ख़ुशी हुई। हमारा मानना है कि हम औरों के साथ अपना तुलना करके सबसे ज़्यादा असंतुष्ट होते हैं। यह एक व्यर्थ प्रयास है। इससे दूर रहिए। 

धन केवल तनख्वा या मासिक रोजगार ही नहीं है। कैसे हम अपने धन की वृद्धि करेंगे इसके लिए प्लानिंग करना आवश्यक होता है। कुछ इंसान केवल आज के लिए जीते हैं। उनका कहना है कि कल किसने देखा है। आज जी भर कर जीयो। मुझे ऐसे सोच से कोई असुविधा नहीं है। केवल इतना ही कहना है कि कल क्या होगा किसको पता परंतु कल के सफर के लिए रहना है तैयार। इसी में होशियारी है। ऐसा कोई इंसान नहीं है जिसने अपनी ज़िन्दगी में उतार चढ़ाओ नहीं देखें हो। इसी लिए हमारे पूर्वज कन्या के विवाह के समय सोने के अलंकार को स्त्रीधन का दर्जा देते थे जिसका मूल्य सदा बढ़ता रहेगा और कठिन समय में पैसों की जरूरत को मिटा सकता है। अभी हमारे देश में निवेश और पैसों को बढ़ाने के कई तरीके हैं। केवल एकमात्र प्रलोभन से दूर रहना जरूरी है -तुरंत पैसा बढ़ाने के वादे करने वाले उपाय का। फिर तो यह जुआ का दर्जा ले लेता है। और हम सबको पता है कि जुआ इंसान को  सर्वनाश कर सकता है। 

चैन ,प्रगति और स्वास्थ का एक अनदेखा बंधन है। प्रगति के लिए बेचैनी आवश्यक है। परन्तु हद से ज्यादा बेचैनी स्वास्थ बिगाड़ सकती है। संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एकमात्र उपाय है अपने प्रयास पर फोकस करना। परिणाम पर नहीं। क्योंकि परिणाम पर किसी का कण्ट्रोल नहीं है। परन्तु अपने प्रयास पर हर किसी का कण्ट्रोल है। प्रयास का क्वांटिटी और क्वालिटी दोनो पर नज़र रखना आवश्यक है। उदाहरण स्वरुप अगर डॉक्टर ने मुझे वजन घटाने के लिए हफ्ते में पाँच दिन ४५ मिनट का द्रुत वाक करने का निर्देश दिया है तो पाँच दिन ४५ मिनट चलना प्रयास का क्वांटिटी है। ४५ मिनट में हम कितना किलोमीटर चल रहें हैं प्रयास का क्वालिटी है। जितना ज़्यादा किलोमीटर चलेंगे उतना ही प्रयास का क्वालिटी बेहतर है। इस सन्दर्भ में आखरी बात उन अभिभावकों के लिए है जो कि अपने बच्चों के परीक्षा के रिजल्ट के लिए अपनों का और बच्चे का चैन न्योछावर कर देते हैं। अगर आपके टेंशन करने से रिजल्ट्स बेहतर हो जाएंगे तो फिर बच्चे को पढ़ कर परीक्षा की तैयारी नहीं करनी परती। आपका टेंशन ही उनके रिजल्ट्स बेहतरीन कर दिए होते। परन्तु ऐसा कभी नहीं होता है। बच्चे को प्रोत्साहित कीजिए पढ़ाई का आनंद लेने का। बच्चा सीखेगा और यही उसका ज़िन्दगी का सम्पद बनने वाला है। 

आपका यह वित्तीय वर्ष सफलता के साथ संपन हो यही दुआ रहेगी हमारी। अगला साल और बेहतर हो यही हमारी आशा रहेगी। फिर मिलेंगे अगले वित्तीय वर्ष में। खुश रहिये। 

शुक्रवार, 2 फ़रवरी 2024

नमस्कार। २०२४ का दूसरा महीना। वित्तीय वर्ष के अंत से दो महीने दूर। फ़रवरी का महीना। वैलेंटाइन्स का महीना। रोमांस का महीना। रोमांस क्या केवल युवा पीढ़ी के लिए है। या हर किसी के लिए है। मेरा मानना है कि रोमांस ज़िन्दगी के लिए है। रोमांस के बिना ज़िन्दगी अधूरी है। सहमत हैं आप। या उत्सुक हैं मेरे इस धमाकेदार ऐलान का सन्दर्भ समझने के लिए। यही आज के लेख का मूल  विषय है। 

रोमांस का मतलब क्या है। प्यार। मोहब्बत। या और कुछ। जब आप किसी से रोमांस करते हो तो क्या होता है। आप उसके साथ ज़्यादा से ज़्यादा समय बिताने की कोशिश करते हो। आप उनको और बेहतर समझने का निरंतर प्रयास करते हो। क्या अच्छा लगता है क्या बुरा लगता है उसका ध्यान रखते हो और चेष्टा रहती है कि हम वह करें जो कि उन्हें अच्छा लगता है। सबसे बड़ी बात है कि रोमांस के लिए किया हुआ मेहनत कभी थकान नहीं महसूस कराती है। हमें आनंद मिलता है ऐसे मेहनत का। हम उस क्षण के लिए सोचते हैं और एक उज्वल और आनंदमय भविष्य का उम्मीद रखते हैं। 

हमारा क्रिकेट के लिए पागल देश है। हर किसी का एक या अधिक फेवरिट क्रिकेटर होता है। ऐसे क्रिकेटर के सफलता का राज़ क्या है। क्रिकेट के साथ रोमांस। घंटों अभ्यास गर्मी ,बरसात ,ठंड के मौसम में। हाई प्रेशर मैच में परफॉरमेंस का आनंद। निरंतर खुद को ,फैंस को और दर्शकों को और आनंद देने के लिए मेहनत और फोकस। यह है खेल के साथ रोमांस। 

बॉलीवुड के किरदार -हीरो ,हीरोइन ,विलेन -सब का फैन होता है। यह लोग हमें परदे पर दिखते हैं। परन्तु एक सफल फिल्म के लिए अनगिनत ऐसे लोग काम करते हैं जिन्हें हम दर्शक नहीं देख पाते हैं। उनके सम्मिलित प्रयास के बिना फिल्म नहीं बन सकती है। ऐसे लोग अपने पेशे के साथ रोमांस करते हैं यह जान कर भी कि फिल्म का श्रेय अभिनेता और डायरेक्टर को प्राप्त होगा। दर्शक उनके काम के साथ रोमांस को नहीं समझ पायेंगे। परंतु फिल्म इंडस्ट्री में उनका कदर बढ़ता है। 

आप जो भी कर रहे हो उसके साथ रोमांस करो। विद्यार्थी किसी भी सब्जेक्ट के साथ , नौकरी या बिज़नेस वाले अपने पेशे के साथ। घर में रहने वाले किसी भी विषय के साथ जिससे आपको और परिवार को फायदा हो। मेरे कुछ मित्र रिटायर होने के बाद वेद ,पुराण ,गीता ,रामायण या महाभारत को समझने के लिए इन के साथ रोमांस में डूब गए हैं। 

आपको केवल यह निर्णय करना है कि आप किसके साथ रोमांस करना चाहते हो। यह पहला कदम है आपके रोमांस के लिए। फिर रोमांस में डूब जाईये और ज़िन्दगी का और भी आनंद लीजिये। हैप्पी वैलेंटाइन्स डे। खुश रहिए। 

शुक्रवार, 5 जनवरी 2024

Happy New Year

नमस्कार। २०२४ के लिए हमारी शुभकामनाएँ। हैप्पी न्यू ईयर। हम हर किसी को नए साल के शुरुआत में  हैप्पी न्यू ईयर कह कर ऊनके लिए हैप्पी होने का दुआ करते हैं। आज का लेख इसी सन्दर्भ में है। 

हम खुद चाहते हैं कि हम हैप्पी रहें और हमारे अपने भी हैप्पी रहें। परन्तु हमने कभी यह सोचा है कि हमारा हैप्पीनेस का मापदंड क्या है और हम कैसे अपना हैप्पीनेस बढ़ा सकते हैं ? आपने कभी सोचा है इस विषय पर अपने लिए ? क्या निष्कर्ष रहा आपका ,खुद के लिए ? आपने क्या कभी अपनों के लिए यही प्रश्न किया है ? अपने जीवन साथी को क्या हैप्पी बनाता है ? शायद आपने उतनी गहराई के साथ सोचा होगा जैसा कि आप इस वक़्त सोच रहे होगे ,इस लेख को पढ़ते वक़्त। 

हैप्पीनेस दो तरह के होते हैं -एक जो कि अप्रत्याशित है और दूसरा जो कि परिकल्पित या प्लैन्ड है। उदहारण स्वरुप आप चाहते हैं कि आपका बच्चा, जो कि पढ़ाई में ज़्यादा दिलचस्पी नहीं रखता है ,परीक्षा में अच्छे मार्क्स लेकर आए। सहज प्रश्नपत्र होने की वजह से अगर उसे अच्छे मार्क्स मिल जाए तो आप हैप्पी हो जायेंगे। यह अप्रत्याशित हैप्पीनेस का एक नमूना है। एक और उदाहरण -आप अपना वज़न कम करना चाहते हो।  कुछ नहीं करने के बावजूद आपका वज़न घट जाता है। आप हैप्पी हो जाओगे। अप्रत्याशित हैप्पीनेस। एक मात्र असुविधा है कि इस हैप्पीनेस पर आपका कोई कण्ट्रोल नहीं है। आप इसको दोहरा नहीं सकते हो। आपको अच्छे समय का इंतज़ार करना पड़ेगा। हैप्पी होने के लिए। 

परिकल्पित हैप्पीनेस के लिए यह समझना पड़ेगा कि मेरा हैप्पीनेस कहाँ छुपा है। मेरा तजुर्बा बताता है कि हम खुद के साथ इस विषय पर सोचते नहीं हैं। कुछ ऊपरी अनुभूति हमें खुश करती है। जैसा कि मैं चूँकि खाने का शौक़ीन हूँ ,अच्छा खाना मुझे खुश कर देता है। यह ख़ुशी महत्वपूर्ण और जरूरी है। परन्तु जिस  ख़ुशी को समझने के लिए और गहराई से सोचना जरूरी है ,उस पर सोच विचार करना जरूरी है। मुझे ख़ुशी मिलती है जब मैं दूसरों को प्रोत्साहित कर पाता हूँ अपने सोच के माध्यम से। यह उपलब्धि मुझे तब हुई जब आप जैसे कई पाठक मेरे साथ फेसबुक के माध्यम से मेरे साथ जुड़ने लगे , मुझे प्रश्न पूछने लगे अपने कैरियर या दुविधा के विषय में। इस लिए मैं हर महीने कोशिश करता हूँ नए सोच के साथ अपने लेख को पेश करने का। 

अपनों के हैप्पीनेस के विषय में हम अक्सर एक गलती कर बैठते हैं। हम अपने हैप्पीनेस को अपनों का हैप्पीनेस समझ बैठते हैं। कई अभिवावक अपने बच्चों को गाना सीखने के लिए मजबूर करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि गाना सीखने से बच्चे को दूसरे बच्चों के तुलना में आगे रहने में सहायता होगा और उनको अपने बच्चे पर और गर्व होगा। परन्तु बच्चा शायद गाना सीखने में दिलचस्पी ना रखता हो। मजबूरी के कारण वह गाना सीखने की कोशिश करता है। ताकि उसके अभिवावक नाराज ना हो। यह हैप्पीनेस का गलत नमूना है। 

मेरा मानना है कि हमें अपने लिए हैप्पीनेस के लिए ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिसके कारन कोई और दुखी हो जाए। यही हैप्पीनेस का पहला नियम है। परन्तु हैप्पीनेस का मूल मंत्र क्या है ? हाल में एक हिंदी सिनेमा में मुख्य किरदार ने एक बेमिसाल डायलाग बोला है -हैप्पीनेस इस अ डिसिशन -अर्थार्थ हमारी ख़ुशी हमारा डिसिशन है। और किसी का नहीं। खुश रहिए। हैप्पी न्यू ईयर। 

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

नमस्कार। साल का आखरी महीना। हर कोई चाहता है कि यह महीना अच्छे से गुज़र जाय और हम नए साल में बिना किसी बाधा या असुविधा के साथ प्रवेश करें। जरा सोचिए उस मजदूरों और उनके परिवार के विषय में जो की एक सुरंग में अटक गए थे। ४१ मजदूर और उनके परिवार पर क्या गुजरी होगी। उन सबको सलाम जिन्होंने अनहोनी को होनी कर दिखाया। सबसे ज़्यादा हौसला बढाती है मजदूरों का साहस और वापस उसी काम में जाने का निर्णय। उन्होंने प्रमाण कर दिखाया है कि डर के आगे जीत है। और यही सोच उनको विश्वास दिला रहा था जब तक वह अंदर थे। कैसे संभव  हुआ यह अभियान ? यही आज के लेख का विषय है। 

पहली बात है टीम वर्क। जो अंदर थे और जो बाहर से मदत कर रहे थे ,उनमें ताल मेल बेहतरीन रहा। अंदर -बाहर दोनों टीम के सदस्यों ने एक दूसरे का साथ निभाया और नेतृत्व की बात सुनी। चूँकि कठिन था उद्धार कार्य तरह तरह के विशेषज्ञ जुड़ रहे थे इस अभियान में। इसका मतलब है कि लीडर बदल रहा था जरूरत के अनुसार। और टीम के सदस्य इस परिस्थिति पर निर्भर अलग अलग लीडर को स्वीकार किया और उनके निर्देशों का पालन किया। यह बहुत महत्वपूर्ण है हमारे हर किसी के जीवन में। इसे कहते हैं विशेषज्ञ का नेतृत्व जो कि उम्र में कम या जूनियर हो सकता है। दबे हुए लोगों में दो लीडर थे और उनकी बात सब लोगों ने सुना। काम करते वक़्त अगर उनमें कोई मतभेद होता भी होगा , उन्होंने संकट के समय ऐसे विचारों को अपने बीच दरार करने नहीं दिया। 

दूसरी बात है संचार बरक़रार रखना दोनों टीम के बीच। और सबसे महत्वपूर्ण सीख है कि जब संचार बरक़रार रखने के लिए वार्तालाप संभव नहीं हो रहा तब इशारों के माध्यम से संचार बनाए रखना है। दबे हुए टीम के लीडर ने दिमाग लगा कर पानी के सप्लाई को चालु और बंद किया बीच -बीच में ताकि बाहर के टीम को यह समझ में आए कि अंदर लोग जिन्दा हैं और दिमाग के साथ काम कर रहें हैं। इसी लिए कहा जाता है कि समझने वालों के लिए इशारा ही काफी है !

तीसरी बात है डर और स्ट्रेस का सामना करना। कोई भी ऐसी परिस्थिति में घबड़ा जाएगा। यही स्वाभाविक है। परन्तु परिस्थितिओं का मूल्याङ्कन करने के बाद इस डर से जूझने का रणनीति सोच कर प्रयोग करना ही एक मात्र उपाय होता है। और घबराहट को दूर करने का एक उपाय है अपने अंदर के बच्चे को प्रोत्साहन देना। बच्चे कम डरते हैं। यही दबे हुए टीम ने किया। बचपन में जो खेल सब ने खेला है ,उसमें मशगूल रहे। दिमाग व्यस्त रहा और टेंशन भी कम हुआ। 

चौथी सीख है शीर्ष स्थानीय नेतृत्व का हर वक़्त वहाँ मौजूद रहना और लगातार निर्णय लेना बिना किसी विलम्ब के। मशीन लाए गए। विशेषज्ञ देश -विदेश से बुलाए गए और अंत में एक ऐसे टीम को बुलाया गया जिन्हें 'रैट माइनर्स ' के नाम से सम्बोधित किया जाता है और जो अपने हातों से खुदाई करते हैं। दो -तीन निर्णय ऐसे लिए गए जिसमे रिस्क या खतरा था , परन्तु शीर्ष नेतृत्व ने ऐसे फैसले लिए बिना विलम्ब के जो कि फायदेमंद रहे। इसी लिए कहा जाता है कि ज़िन्दगी में रिस्क ना लेना ही ज़िन्दगी का सबसे बड़ा रिस्क होता है। 

अंतिम सीख है विश्वास करना और उम्मीद के साथ मुक़ाबला करना की हमें विजय प्राप्त होगा। अपने आप पर और पूरी टीम पर भरोसा रखना अति आवश्यक है। बाहर निकलने के बाद दो में से एक लीडर ने सामवादिक सम्मेलन में गर्व के यह बोला कि हमारे देश ने विदेश से भारतीय नागरिकों को कठिन परिस्थितिओं से बचाव किया और सुरक्षित उनके परिवार वालों से मिलाया है। हम तो अपने देश में ही थे !

४१ परिवारों को बधाई और सलाम आपके धैर्य और अधिकारिओं पर भरोसा रखने के लिए। और सादर प्रणाम टीम के हर सदस्य को इतने जान को सुरक्षित उद्धार करने के लिए। मेरा अटूट विश्वास है कि इस घटना पर फिल्म जरूर बनेगी। जो भी यह फिल्म बनाएगा उनसे सविनय निवेदन है कि उस फिल्म के अभिनेता इन्हे ही बनाइये क्योंकि यही असल हीरो हैं !

आप सब को नए साल की अग्रिम बधाई। स्वस्थ रहिए और ख़ुश रहिए। फिर मुलाकात होगी नए साल में।