शुक्रवार, 4 अगस्त 2023

नमस्कार। अगस्त का महीना। स्वाधीनता दिवस का महीना। आज़ादी का ७६ साल में हमारा भारत कदम रखा है। हमने आज़ादी का महोत्सव बखूबी मनाया है इस साल। सश्रद्ध प्रणाम उन सब वीर को जिन्होंने अपने तरीके से आज़ादी का जंग लड़ा जिसके कारण हम सबका जन्म आज़ाद भारत में हुआ। शायद हम सब किसी न किसी परिवार के विषय में जानते हैं जिनके किसी पूर्वज ने अपना भूमिका निभाया आज़ादी की लड़ाई में। सबसे महत्वपूर्ण विषय है कि लोगों ने अपने आप इस जंग में हिस्सा लिया -किसी ने उन्हें मजबूर नहीं किया। यह  निःस्वार्थ योगदान कुछ हद तक मजबूरी भी थी।  हमने कभी पराधीन होने का अनुभव महसूस नहीं किया है। जिन्होंने किया है एक ही बात कहा है पराधीनता के विषय में -दम घुटता है। हमने तो आज़ादी हासिल कर ली है। परन्तु क्या हम औरों के स्वाधीनता के विषय में जागरूक हैं ? आज का लेख का विषय है स्वाधीनता ,स्वाधीन देश में। 

जरा सोचिये। अगर आप नौकरी करते हैं तो यह बताईये कि क्या आपको कर्मस्थल में ऐसी सब स्वाधीनता मौजूद जो कि आपको अपने काम के लिए जरुरत है और जो की आपके कंपनी के लिए फायदेमंद है ? अगर आपको काम के क्षेत्र में ऐसी स्वाधीनता प्राप्त हो ,तो आप खुशकिस्मत हो। मेरा तजुर्बा कहता है कि अधिकतर लोगों को यह स्वाधीनता नहीं मिलता है। 

एक और उदाहरण लीजिये अपने घर से। अपने परिवार में महिलाओं को कितनी स्वाधीनता प्राप्त है ? और बच्चों को ? बच्चोँ की उम्र बढ़ती ही नहीं है ,अभिवावकों के नज़र में। अकसर हम पुरुष निर्णय लेते हैं कि किसको कितना स्वाधीनता प्राप्त होगा। हम कौन होते हैं इस अधिकार का हक़ जताने का। हमारे देश में यह एक बड़ी समस्या है। सरकार को भी बेटी बचाओ का अभियान चलाना पड़ता है। इस शताब्दी में लड़कियों ने काफी प्रगति की है -अपने कैरियर में और अपनी स्वाधीनता के लिए। कई क्षेत्र में सरकार का प्रयास भी सराहनीय है -जैसे भारतीय सेना में महिला फाइटर पायलट का नियोग। 

थोड़ी चर्चा करते हैं कि क्यों हम औरों को स्वाधीनता प्रदान करने से हिचकिचाते हैं - कर्मस्थल पर या घर में या समाज में। मेरा निष्कर्ष इस मुद्दे पर यह है कि हम किसी को स्वाधीनता देने से इंकार करते हैं क्योंकि हम  एक गलतफहमी के गुलाम है। हमारा सोच है कि किसी को स्वाधीनता देने से हमारा पॉवर घट जायेगा। अगर आगे वह हमारा बात ना सुने। अगर वह स्वाधीनता प्राप्त करने के बाद हमारे हाथ से निकल जाए। 

पहला कदम क्या है दुसरों को स्वाधीनता प्रदान करने में। खुद को खुशकिस्मत समझना कि हमें ऐसा अधिकार है कि हम किसी को स्वाधीनता दे सकते हैं। इसके लिए अपने आप पर भरोसा रखना जरूरी होता है। अंग्रेजी में जिसे सेल्फ कॉन्फिडेंस कहते हैं।

दूसरा कदम है कि हम किसको स्वाधीनता दे सकते हैं। उसी को जिस पर भरोसा कर सकते हैं कि स्वाधीनता मिलने पर वह इंसान उस स्वाधीनता का नाजायज फायदा नहीं उठाएगा और उसमें क्षमता है कि वह अपना निर्णय खुद ले सकता है। हमने कई लोगों को स्वाधीनता मिलने के बावजूद स्वाधीनता स्वीकार करने का कॉन्फिडेंस नहीं दिखा पाता है। एक उदाहरण के तौर पर आपने कर्मक्षेत्र में कई ऐसे लोगों को देखा होगा जिनको किसी विषय में निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है परन्तु यह इंसान एक बार अपने बॉस से पूछ लेना चाहता है। ऐसा इंसान कभी भी काम के क्षेत्र में स्वाधीनता नहीं चाहता है। 

तीसरा कदम है स्वाधीनता प्रदान करने के बाद उसका मॉनिटरिंग करना। यह ऐसा नहीं हो सकता है कि उसका स्वतंत्रता घुटता महसूस हो। मान लीजिए आपने अपने बच्चे को कुछ जेब खर्च दिया है पहली बार। हर रोज़ आप यह नहीं पूछ सकते हो कि क्या ख़रीदा ,बिल दिखाओ। महीने में या हफ्ते में एक बार आप जरूर चर्चा कर सकते हो जेब खर्च मिलने की वजह से बच्चे को क्या फायदा हो रहा है और वह उस पैसे का इस्तेमाल कैसे कर रहा है। बहुत सारे अभिभावक यह जान कर अचंभित हो जाते हैं जब बच्चे उन्हें यह बताते हैं कि जेब खर्च का संचय करके कुछ नया खरीदना चाहते हैं। 

यह महीना रक्षा बंधन के त्यौहार का पुण्य महीना है। जिनके ज़िन्दगी में बहनें हैं उन्हें सोचना चाहिए कि इस अवसर अपने बहन को कौन सा स्वतंत्रता देंगे या दिलायेंगे। यह आपके बहन के लिए सबसे उमदा उपहार होगा। सोचिये और कीजिए। हमारे स्वाधीनता दिवस के लिए आप सब को अग्रिम बधाई। स्वतंत्र रहिये और दूसरोँ के स्वतंत्रता का सम्मान कीजिए। अपने जीवन से आपको और अधिक आनंद मिलेगा। 

बुधवार, 28 जून 2023

नमस्कार। इस साल के छह महीने गुज़र गए। आधा समय चला गया। आपने इन महीनों में क्या हासिल किया है ?वक़्त ऐसे ही बीत जाता है। अचानक हमें महसूस होता है कि वक़्त गुज़र गया परन्तु हमने कुछ नहीं किया है और पश्चाताप करते हैं। इससे कोई फायदा नहीं होता है। हमें इस वक़्त का फायदा उठाना जरूरी है। इसके लिए निर्णय लेने में हिचकिचाने से मौका हाथ से निकल जाता है। और इसी में हारने का दुःख या जीतने का आनंद होता है। शायद आप २०११ साल में मुंबई में आयोजित विश्व कप क्रिकेट के फाइनल मुक़ाबले में भारत और श्री लंका के मैच को नहीं भूल गए हैं। हमारे कप्तान कूल ने बैटिंग क्रम बदल कर हमें जीत हासिल करने में मदत की। इसके विषय उन्होंने अपने निर्णय के पीछे का कारण भी बताया है। 

आज का लेख हमारे कप्तान कूल के नेतृत्व के विषय में है। पहली वजह इस विषय का है ७ जुलाई -हमारे कप्तान का जन्मदिन। बधाई हो आपको। स्वस्थ रहें और मार्ग दर्शक बने रहें हम सब का। दूसरा कारण इस विषय के चयन के पीछे है उनका इस साल आई पी एल में अपने टीम को चैंपियन बनाना। उनकी टीम को किसी भी क्रिकेट के पंडित ने टूर्नामेंट के शुरू में फेवरिट का तक्मा नहीं दिया क्योंकि उनकी टीम उतनी मजबूत नहीं थी। और इसी वजह से उनकी टीम के इस जीत पर हम सब आश्चर्यचकित रह गए। 

क्या गुण हैं हमारे कप्तान कूल के जो उन्हें इतना सफलता दिलाता है। मुझे पता है कि ऐसी चर्चा काफी हुई है। मैंने भी इस विषय पर लिखा है। फिर इस बार क्या नया है। इस लेख में मैं तीन  नए गुण का ज़िक्र करूँगा जो शायद आप पहली बार सुनोगे। 

उनकी मुस्कान -हमारे कप्तान कूल के होठों पर एक मुस्कान हमेशा मौजूद होता है। इस मुस्कान का असर उनके टीम पर और उनके साथ जो जुड़ते हैं उन पर एक मोह बन जाता है। एक इंसान कब ऐसा कर सकता है। तभी जब वह खुद अंदर से विचलित नहीं होता है। और खेल के मैदान में किसी भी खिलाड़ी का सबसे ज़्यादा टेंशन किस विषय का होता है -खेल में हार जाने का। जो भी इंसान इस बात से समझौता कर ले कि किसी भी खेल में हार और जीत एक ही सिक्के के दो पहलु हैं ,वही हार से कभी नहीं डरेगा। और इसी डर के दूर होने पर एक सुकून आता है , अंदर से , जो कि खिलाड़ी को और लीडर की हैसियत से टीम को रिलैक्स करने में मदत करता है। टेंशन करने से परफॉरमेंस ख़राब होने का संभावना बढ़ जाता है। परिणाम पर किसी का कंट्रोल नहीं है। अपने मेहनत पर १०० प्रतिशत कण्ट्रोल है। कप्तान कूल खुद और अपने टीम को मेहनत पर ही फोकस करने पर मजबूर करता है।  

अपने निर्णय पर विश्वास -चाहे परिणाम कुछ भी हो। इस साल आई पी एल के एक मैच में उन्होंने टॉस जीतने के बाद पहले बैटिंग करने का निर्णय लिया। यह मैच उनकी टीम बुरी तरह से हार गई। मैच के अंत में वही मुस्कान और कमेंटेटर ने जब पूछा कि शायद पहले बैटिंग करने का निर्णय सही नहीं था।  इस बात का कोई दुःख है। कप्तान ने बैटिंग करने के सिद्धांत के पीछे का कारण बताया। फिर बताया कि मैच के दौरान पिच का रुख बदल गया जो उन्होंने सोचा नहीं था। ऐसा होता है और इस हार का उनका कोई गम नहीं है। 

अपनी और टीम के हर सदस्य के काबिलियत को समझना और उसके अनुसार रणनीति का चयन और प्रयोग करना। आपने ख्याल किया होगा कि इस साल के आई पी एल में कप्तान ने खुद को बैटिंग क्रमांक में काफी नीचे उतार दिया था। उनको टीम में अपना भूमिका क्या है इसका सही निर्णय उन्होंने किया था। पहली जिम्मेवारी नेतृत्व , दूसरी विकेट कीपिंग और तीसरा धुआंधार बल्लेबाज़ी।  उनको मालूम है कि टीम के अन्य सदस्य उनसे पहले बैटिंग करेंगे क्योंकि उसी में टीम का भला है। इंग्लैंड के टेस्ट टीम के बर्तमान कप्तान और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ आल रॉउंडर जब चोट की वजह से बोलिंग ना कर सके तो उनके जगह पर कप्तान कूल ने ऐसे बल्लेबाज़ को मौका दिया जिनका प्रदर्शन पिछले तीन सालों में इतना ख़राब था कि कोई भी टीम इस खिलाड़ी को नहीं खरीद रहा था। इस खिलाड़ी एक नया अवतार हम सब ने देखा। कप्तान ने इस निर्णय के विषय में क्या कहा ? चूँकि विपक्ष के हर टीम में कई सारे तेज़ गति के गेंदबाज़ थे जो कि पारी के शुरू में गेंदबाज़ी करेंगे ,उन्हें अपने टीम में तीन नंबर पर ऐसा एक बल्लेबाज़ जरूरत था जो कि तेज़ गेंदबाज़ों को खेलने में माहिर हो। उन्होंने इस बल्लेबाज़ को ऐसा समर्थन दिया जिसके कारण ना ही इस बल्लेबाज़ ने अपनी टीम के चैंपियन बनने में अहम् भूमिका निभाई , उन्होंने भारतीय टेस्ट टीम में अपनी वापसी भी की। यही है कप्तान कूल का नेतृत्व में खेलने का परिणाम। 

कप्तान कूल -आपको जन्मदिन बधाई हो। आप शायद अगले कुछ वर्षों में अवसर लोगे खिलाड़ी के हैसियत से। परन्तु पिकचर अभी बहुत बाकी है कप्तान। हमें इंतेज़ार रहेगा कप्तान कूल के अगले अवतार का। स्वस्थ और खुश रहिए। यह हम सब की दुआ है। 

गुरुवार, 22 जून 2023

 Press Release

सीड अकादेमी इंडिया ने एक नए कार्यक्रम का ऐलान किया है। हिंदी में अंग्रेजी बोलना सीखिए। सीड अकादेमी इंडिया कलकत्ता में स्थापित और स्थित एक कंपनी है जिसके प्रतिष्ठाता दीपक प्रामाणिक कॉरपोरेट दुनिया में एक इज़्ज़तदार हस्ती हैं। उन्होंने इस कोर्स की घोषणा करते हुए कहा कि अधिकतर लोग अंग्रेजी भाषा से वाकिफ हैं परन्तु अंग्रेजी भाषा बोलने से झिझकते हैं। इसी वजह से ऐसे इंसान अंग्रेजी बोल नहीं सकते हैं और अपने जीवन से औरअधिक आनंद पाने से वंचित हो जाते हैं। 

कर्म जीवन में भी कॉन्फिडेंटली अंग्रेजी बोलने का फायदा मिलता है। कई पदों के इंटरव्यू में उत्तीर्ण होने के लिए अंग्रेजी कॉन्फिडेंटली बोलना आवश्यक होता है।  पारिवारिक ज़िन्दगी में कई अभिभावक अपने बच्चे के स्कूल में अंग्रेजी भाषा में पैरेंट -टीचर मीटिंग में वार्तालाप करना चाहते हैं ,परन्तु इस झिझक के कारण बोल नहीं सकते हैं। 

सीड अकादेमी का इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स -हिंदी में कॉन्फिडेंटली अंग्रेजी बोलना सीखिए कई कारण से बाजार में मोजूदा कोर्स से अलग है। 

  1. क्लास में ट्रेनर हिंदी भाषा का प्रयोग करता है। सोचिये आप अंग्रेजी बोलना सीख रहे हो और आपका ट्रेनर अंग्रेजी भाषा में बात कर रहा है। क्या आप सब कुछ समझ सकोगे ? या हिंदी में बेहतर समझ सकोगे ?
  2. बचपन में कोई नया भाषा सीखना आसान होता है क्योंकि हमारा सोच पर तजुर्बे का कोई प्रभाव नहीं होता है। वयस्क लोगों को हर नए चीज़ को अपने तजुर्बे के अंदाज़ से देखने का अभ्यास है। आपके ट्रेनर इस बात को समझ कर ऐसे उदाहरण के माध्यम के सहायता से आपको अंग्रेजी सीखने में मदत करते हैं। 
  3. किसी भी भाषा को बोलना सीखने के लिए एक मात्र उपाय है उस भाषा में बात करना। हमारे क्लास में यही प्रयास रहता है हमारे ट्रेनर का। यही नहीं खुद अंग्रेजी बोलना प्रैक्टिस करने के लिए एक एप्प बनाया जा रहा जो कि आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI ) के माध्यम से फीडबैक देगा आपके अंग्रेजी को बेहतर बनाने के लिए। 
  4. हमारा क्लास ऑनलाइन वीडियो क्लास है जिसमे आप लाइव क्लास में दुनिया के कहीं से अटेंड कर सकते हैं। 
  5. हर दूसरे दिन क्लास होगा। डेढ़ घण्टे का क्लास होगा। ऐसे ३० क्लास होंगे। कुल ४५ घंटों का यह पूरा कोर्स है। 
  6. पूरे कोर्स की कीमत मात्रा ३००० रुपये हैं। आप १००० रूपये के तीन किष्तों में अपना फीस दे सकते हैं। अगर आप एक बार में पूरा फीस देंगे तो आपको ५०० रूपये का डिस्काउंट मिलेगा और आप ३००० रुपये के जगह मात्र २५०० रुपये देंगे पूरे कोर्स के लिए। 
  7. पहला क्लास ७ जुलाई २०२३ को शाम ७:३० बजे से रात के ९ :०० बजे तक होगा। यह क्लास आप बिना कुछ फीस पे करके अटेंड कर सकते हैं। इस क्लास को अटेंड करने के बाद आप अपना फीस पे कर सकते हैं। 
  8. अधिक जानकारी के लिए seedacademyindia.com के वेबसाइट पर जा सकते हैं या ९९०३७४७२१३ पर फ़ोन कर सकते हैं। 
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शुक्रवार, 2 जून 2023

नमस्कार। जून का महीना। गर्मी से बरसात की ओर मौसम का सफर। भयानक गर्मी से हमारे देश के अधिकतर राज्य के लोग परेशान। मौसम दफ्तर से तुरंत इस गर्मी से राहत मिलने की भविष्यवाणी नहीं सुनाई पड़ रही है। संयोग से आज विश्व पर्यावरण दिवस है। 

वर्ष 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मानव पर्यावरण विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा का आयोजन किया गया था। इसी चर्चा के दौरान विश्व पर्यावरण दिवस का सुझाव भी दिया गया और इसके दो साल बाद ,5 जून 1973 से इसे मनाना भी शुरू कर दिया। इसमें हर साल 143 से अधिक देश भाग लेते हैं और इसमें कई सरकारी ,सामाजिक और व्यावसायिक लोग पर्यावरण की सुरक्षा, समस्या आदि विषय पर बात करते हैं। 

मेरे लिए इस दिवस को हम सब को निजी हैसियत से समझना और निभाना चाहिए। अगर हम सब केवल अपने और हमारे ज़िन्दगी से युक्त कार्य कलाप का मूल्यांकन करे और यह समझ ले कि हम ऐसा क्या कर रहें हैं जो कि पर्यावरण को दूषित कर रहा है और उन सब गतिविधियों को ना करें तब हम अपनी ओर से विश्व पर्यावरण और दूषित ना करने में अपना कर्त्तव्य निभाएंगे। मैंने निर्णय किया है कि मैं प्लास्टिक बैग का प्रयोग वर्जित करूँगा अपनी ओर से। और हमारे परिवार ने निर्णय लिया है कि हम घर में और घर के चलने में पानी का अपचय रोक देंगे। छोटा प्रयास है परन्तु महत्वपूर्ण प्रयास है। इरादे तो सठीक हैं परन्तु क्या हम डिसिप्लिन के साथ हमारे इरादों पर टिके रह पाएंगे। अनुशाषन या डिसिप्लिन ही किसी भी प्रयास में सफल होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। 

हाल में किसी ने मुझे एक वीडियो फॉरवर्ड किया। इस वीडियो एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के एक अध्यापक ने एक रिसर्च किया है। इस रिसर्च या अनुसंधान का विषय था सफल और प्रसिद्ध इंसानों के सफलता तक और सफल बने रहने के सफर का अध्ययन करके इस निष्कर्ष पर पहुँचना कि सफलता के पीछे कोई ऐसा राज़ छुपा है जो कि हर सफल इंसान के सफलता का एक कारण है। इस सन्दर्भ में यह बताना जरूरी है कि इस रिसर्च में हर क्षेत्र में सफल लोगों का अध्यन किया गया है। खेल -कूद ,म्यूजिक ,नृत्य ,सिनेमा ,विज्ञान ,साहित्य , हर क्षेत्र के सफल इंसानो के विषय में उनके सफलता के पीछे एक राज़ हर किसी के लिए देखा गया है। 

यह राज़ प्रेरणा नहीं है। यह है डिसिप्लिन या अनुशाषन। मैं भी इस जानकारी से आश्चर्य हुआ हूँ। सबसे चौकाने वाली बात है इन सब सफल लोगों के लिए अनुशाषन की परिभाषा। इनका कहना है कि अनुशाषन उस वक़्त का सहारा है जब दिल और दिमाग दोनों मना करता है वह करने को जिस पर सफलता निर्भर करता है। हारमोनियम पर रिवाज़ जरूरी है परन्तु दिल और दिमाग कह रहा है कि रिवाज़ करने का मूड नहीं है ,तब अनुशाषन मजबूर करता है दिल और दिमाग को वष में लेकर रिवाज़ करना क्योंकि उसका कोई विकल्प नहीं है। 

इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस साल के आईपीएल में मिला है। 2018 में भारतीय क्रिकेट टीम ने under 19 विश्व कप जीता था। इस टीम के कप्तान और उप कप्तान को भविष्य का प्रतिभा माना जाता था। परन्तु इस साल -ठीक पाँच साल बाद उप कप्तान आईपीएल में टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का ख़िताब से आभूषित हुआ और कप्तान को लज्जाजनक तरीके से अपनी टीम से निकल जाना पड़ा। हर क्रिकेट पंडित इस विषय में एक ही निष्कर्ष पर पहुँचा है -एक का अनुशाषन और कप्तान में अनुशाषन का अभाव। 

कप्तान का जब भी जिक्र होता है तब कप्तान कूल का चर्चा आवश्यक होता है। पाँचवी बार आईपीएल का ख़िताब जीतने के लिए मुबारक। आप कैसे प्रेरित करते हो ऐसे टीम को चैंपियन बनने में। जहाँ नए और अनुभवी खिलाड़ी दोनों ऐसे जूनून के साथ खेलते हैं टीम को चैंपियन बनाने में। मैं अगले महीने कप्तान कूल के जन्मदिन के अवसर पर उनके लीडरशिप पर चर्चा करूँगा। 

तब तक आप खुश रहें ,स्वस्थ रहें और पर्यावरण में दूषण कम करने के लिए जो भी संभव हो प्रयास करें। 

शुक्रवार, 5 मई 2023

नमस्कार। मई का महीना। गर्मी का मौसम। और मई दिवस का महीना। मई दिवस अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के नाम से पूरे विश्व में मनाया जाता है। मई दिवस पहली बार 1886 में मनाया गया था। अमरीका में मजदूरों ने दिन में आठ घंटे काम करने की माँग की। उन्होंने बेहतर काम करने का वातावरण, वेतन में बढ़त और अपने मौलिक अधिकारों के लिए मांग की। इस आंदोलन ने मजदूरों की और उनके परिवारों की ज़िन्दगी बदल दी। हमेशा के लिए। जिसका प्रभाव अर्थनीति और ज़िन्दगी पर ऐसा रहा कि वयवसाय करने के पद्धति को बदल डालना पड़ा। आज लेख इस 'अधिकारों' के विषय पर चर्चे के लिए है। 

भारतीय संबिधान ने सात मौलिक अधिकार निर्धारित किया हर भारतीय नागरिक के लिए। समानता का अधिकार , स्वतंत्र जीवन जीने का अधिकार , शोषण के खिलाफ अधिकार , किसी भी धर्म और धार्मिक प्रथाओं को निभाने का अधिकार , शिक्षा और संस्कृति का अधिकार , निजी संपत्ति का अधिकार और  साम्बीधानिक न्याय का अधिकार। 

इस सन्दर्भ  में कभी हमने अपने और दूसरों के अधिकारों के विषय में सोचा है ? शायद उतना नहीं सोचा है। हमने अपने अधिकारों के लिए सोचा है दूसरों के अधिकारों से कहीं ज़्यादा। यही नहीं। हमने कहीं कहीं दूसरों का अधिकार निर्धारित कर देतें हैं अपने दृष्टिकोण के आधार पर। माता -पिता या अभिवावक बच्चों के लिए , शिक्षक विद्यार्थिओं के लिए , पति पत्नी एक दूसरे का और मोहब्बत में प्रेमी एक दूसरे का। बॉस अपनी टीम का। 

यह , मेरे विचार में सही नहीं है। और कुछ हद तक सही भी है। उदाहरण स्वरुप माता -पिता बच्चों का मोबाइल टाइम का प्रतिबंधन लगाते हैं। यह सही है। परन्तु जितना समय निर्धारित करते हैं उसमें बच्चे मोबाइल के साथ क्या करेंगे उसको मजबूर करना सही नहीं है। कुछ अभिवावक कहते हैं कि बच्चे गलत इस्तेमाल करेंगे मोबाइल का इस लिए उन पर नज़र रखना जरूरी है। मैं इस विचार से सहमत नहीं हूँ। कोई भी इंसान अगर छुपा कर कुछ करना चाहता है , तो कोई उसे नहीं रोक सकेगा। 

हम जैसे अपने अधिकारों के विषय में जागरूक हैं और उनको प्राप्त करना चाहते हैं , हम उतना ध्यान अपनी जिम्मेवारिओं पर नहीं देते हैं। अधिकार और उसके साथ जिम्मेवारी एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। और किसी का भी ज़िन्दगी खोटा सिक्का नहीं है। रिश्ते अधिकार और कर्त्तव्य के आधार पर बनते ,सवरतें और बिगड़ जाते हैं। आप सबको निवेदन है कि इस अधिकार और जिम्मेवारी के सिक्के को सावधानी के साथ रखिये। इसी में हम सब का मंगल। हर महीने इस लेख के लिए आपका इंतेज़ार करना आपका अधिकार है और इसको पेश करना मेरी जिम्मेवारी। आपसे मेरी लेख का फीडबैक मिलने की उम्मीद करना मेरा अधिकार है। क्या आप इसको अपना जिम्मेवारी समझते हैं ?

शुक्रवार, 31 मार्च 2023

नमस्कार। नए वित्तीय वर्ष का अभिनंदन। वित्तीय वर्ष का  महत्व मेरे अनुसार ज़्यादा है। व्यवसाय , नौकरी , विद्यार्थी, अवसर प्राप्त हर कोई इस वित्तीय नए वर्ष का इंतेज़ार करता है। उम्मीद के साथ। बेहतर खबर प्राप्त करने के लिए। जरा सोचिये इन्क्रीमेंट कब मिलता है। नए कक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए परीक्षा के रिजल्ट्स कब निकलते हैं। सरकार नए इंटेरेस्ट रेट की घोषणा कब करती है। व्यवसाय में नए साल की शुरुआत कब होता है। अप्रैल के महीने में। 

इस साल मैं आप सब को तीन संभावनाओं के विषय में बताना चाहता हूँ जो कि इस वित्तीय वर्ष के लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रथम संभावना है कि यह साल कोरोना के पूर्व व्यवसाय से ज़्यादा व्यवसाय हो सकता है। यह किसी भी व्यवसाय के लिए संभावना है। परंतु इस सुयोग का फायदा लेने के लिए हर व्यवसाय को कठिन मेहनत करना पड़ेगा  और अधिक  कम्पीटीशन से जूझना पड़ेगा। इसके लिए डिजिटल माध्यम का एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगा। साधारण सी बात है। अगर आप का व्यवसाय डिजिटल दुनिया से हाथ नहीं मिलाएगा तो ग्राहक आपसे हाथ नहीं मिलाएंगे। मैंने खुद देखा है कि कुछ लोकप्रिय दुकानदार अभी भी यु पी आई के जरिए पैसे स्वीकार नहीं कर रहें हैं। इसमें उनका नुकसान है। अधिकतर युवा पीढ़ी इस माध्यम से अपनी खरीदारी का पेमेंट करती है। जो ऐसा व्यवसाय करते हैं ,जहाँ ग्राहक इंटरनेट के माध्यम से ढूंढ़ता है कि वह किस के पास जाएगा अपनी खरीदारी के लिए , अगर आपका व्यवसाय उनके इस सर्च में नहीं उभरता है ,फिर वह आपके पास नहीं आएगा। उदाहरण स्वरुप अगर आप एक सलोन के मालिक हो ,आपको डिजिटल दुनिया में उपस्थिति अब मजबूरी बन चुकी है जिसके बिना आप बिज़नेस में पीछे हो जाओगे। यही डिजिटल दुनिया आप  को घर से और घर पर बैठ कर व्यवसाय करने का मौका प्रदान करती है। 

दूसरी संभावना पहले का एक्सटेंशन है। चूँकि व्यवसाय का अवसर बढ़ने वाला है कम्पीटीशन भी उतना ही बढ़ेगा और एक दूसरे के ग्राहक को छीनने की कोशिश करेगा। एक उदाहरण स्वरुप मैं चर्चा करूँगा अभी ऑनलाइन में डिस्काउंट के साथ दवाई बेचने वाले कंपनीओं का। दवाई के दुकानदार क्या करेंगे इन परिस्थितिओं में। उनके ग्राहक तो उनसे भाग जायेंगे। यहीं पर रिश्ता बनाने का प्रयास जरूरी बन गया है। इस तरह का संभावना हर व्यवसाय के लिए है। ग्रोसरी की दुकानों का भी यही परिस्थिति है। उनके ग्राहकों को पकड़ कर रखने के लिए रिश्तों का साथ लेना पड़ेगा। ऐसा कुछ करना पड़ेगा जो कि ग्राहक को फायदेमंद लगता हो। क्या आप मेरी बात से सहमत हो ? क्या करोगे अपने व्यवसाय में ग्राहकों को पकड़ कर रखने के लिए ? आप मुझे फेसबुक के माध्यम से अपना सवाल पूछ सकते हैं इस विषय पर। मैं जरूर जवाब देने की कोशिश करूँगा। 

तीसरी संभावना है क्वालिटी और ट्रांसपेरेंसी का डिमांड -किसी भी क्षेत्र में। चाहे वह नौकरी के लिए एप्लीकेशन का ,सामग्री या सर्विस खरीदने में या किसी भी रिश्ते में जुड़ने में। यह भविष्य में और भी महत्वपूर्ण हो जायेगा। हम कुछ भी , जो कि सच नहीं है ,छुपा नहीं सकेंगे। और एक बार कोई सच्चाई को छुपाते हुए पकड़ा गया ,उससे रिश्ता तोड़ दिया जायेगा और दूसरों को सतर्क कर दिया जायेगा -इससे दूर रहो। मैंने कई इंटरव्यू के बायो डाटा में अक्सर देखा है कि लोग कुछ ऐसे तथ्य का जिक्र नहीं कर रहें हैं , जो आवश्यक है। क्योंकि उसको छुपाना चाहते हैं चूँकि वह उनकी कमजोरी है। कोई भी परफेक्ट इंसान या ब्रैंड नहीं हो सकता है। परन्तु हर कोई सच्चाई के साथ जरूर खुद को या किसी ब्रैंड को पेश कर सकता है। कर के देखिये और लोगों को आपके साथ जुड़ने का आनंद लीजिये। क्योंकि हर इंसान भरोसे का रिश्ता ढूंढ़ता है। 

आपका यह वित्तीय वर्ष सफल हो। यही मेरी दुआ होगी। आप लोग कई सालों से मेरे साथ इस लेख से जुड़े हुए हो। इसके लिए आप सबको दिल से धन्यवाद। इस महीने से आप मेरे फेसबुक पेज पर पुराने कुछ लेख का ऑडियो संस्करण सुन सकोगे। मैं हर वक़्त आपके सुझाव का इंतेज़ार करता हूँ। इंतेज़ार करता रहूंगा।   

शुक्रवार, 3 मार्च 2023

नमस्कार। मार्च के महीने में आपका स्वागत। वित्तीय वर्ष का आखरी महीना। टैक्स बचाने के माध्यम का प्रयोग। होली का त्योहार और अंतर्जातिक  महिला दिवस का महीना। नौकरी और व्यवसाय में साल का टारगेट का तनाव और अगले वित्तीय वर्ष की प्रस्तुति। मार्च का महीना एक व्यस्त महीना। 

मै खुद से पूछ रहा था कि क्यों मैं साल के आखिरी महने तक इंतेज़ार करता हूँ टैक्स बचाने के लिए जो उपाय है उसमें निवेश करने के लिए। यह प्रश्न मैंने अपने धर्मपत्नी से किया। उनका सीधा जवाब -अगर मुझ पर भरोसा करते तो मैं हर महीने निवेश कर के मार्च के महीने पर इतना बोझ नहीं कर देता। पर तुम मर्द लोग तो हम पर वित्तीय मामलों पर भरोसा नहीं करते हो। यद्यपि हम तुम लोगों से इस विषय में ज्यादा माहीर हैं। मैं समझ गया हूँ उनकी बात। हम अकसर महिलाओं के काबिलियत को समझ नहीं पाते हैं या अपने मर्द होने के अहँकार की वजह से समझ कर भी स्वीकार करना नहीं चाहते हैं। 

शायद महिलाओं के सम्मान में इसी लिए 8 मार्च को अंतर्जातिक महिला दिवस के नाम से मनाया जाता है। मेरा प्रश्न है कि केवल एक दिन ही क्यों ? बाकी ३६४ दिन क्यों नहीं ? साल का एक दिवस पुरुष के नाम पर भी लिखा हुआ है ? क्या आप जानते हैं कौन सा दिन है वह ? मुझे पता नहीं था। गूगल करके पता चला कि 19 नवंबर अंतर्जातिक पुरुष दिवस है।  मेरा मानना है कि हम पुरुष लोग महिला दिवस के विषय में ज़्यादा जानते हैं और उसको सेलिब्रेट भी ज़्यादा करते हैं। इसका मनोविज्ञान है कि एक दिन सेलिब्रेट कर के हम महिलाओँ को एक अलग दर्ज़ा प्रदान करते हैं। मेरे ख्याल से हम यह गलत करते हैं। मैं तो यह समझता हूँ कि महिलाएँ हम पुरुष लोगों से किसी भी क्षेत्र में हमसे कम काबिल नहीं हैं। एक विषय हम पुरुष लोग हमेशा महिलाओं से पीछे रह जाएँगे -एक और इंसान को जन्म देने के क्षमता में। 

आपने देखा होगा कि भीड़ सड़क पर अगर कोई गाड़ी बंद पर जाये और चालक अगर महिला हो तो हम टिप्पणी करते हैं महिला चालक है इस लिए ऐसा हो सकता है। हम मर्दों से गाड़ी कभी बंद नहीं पड़ी है। ऐसे विचारों से ही शुरू होता है पुरुषों को खुद को महिलाओं से ज़्यादा काबिल होने का भ्रम। मैं तीन सोच के जरिए इस भ्रम से मुक्ति हासिल कर सका हूँ। पहला महिलाऐं  पुरुष से ज़्यादा काबिल होती हैं। किसी भी हद में कम काबिल नहीं होती हैं सिवाय फिजिकल लड़ाई के लिए। मानसिक लड़ाई में महिलाएँ जरूर आगे हैं। दूसरी बात महिलाओं के साथ इज्जत और बिना उनको कम काबिल सोच कर पेश आने पर उनकी तरफ से हमें कहीं ज़्यादा इज्जत और सम्मान मिलता है। और तीसरा उन पर भरोसा करके देखो। उस भरोसे का इज्जत और जिम्मेवारी किस तरह कोई महिला निभाती है ,प्रशंशनीय होता है। 

अंत में यही विनती करूँगा आप सभी से। महिलाओं को समान दर्जा दीजिए। इसमें सबसे अधिक फायदा हम पुरुषों का है। हमें अपने आप को महिलाओं से बेहतर और ज़्यादा काबिल प्रमाण करने के टेंशन से हमेशा के लिए मुक्ति हासिल कर सकते हैं। 

होली का त्योहार सावधानी के साथ एन्जोय कीजिये। आपके आनंद का कारन किसी के लिए नाराजगी का वजह ना बन जाए इसी का ख्याल रखिएगा। खुश रहिये। स्वस्थ रहिये। फिर मुलाकात होगी.वित्तीय साल के पहले महीने में।