बुधवार, 27 अप्रैल 2022

नमस्कार। मई महीना यानि वित्तीय साल का दूसरा महीना। जो नौकरी में हैं ,इन्क्रीमेंट ,प्रोमोशन और नए इरादों के साथ इस साल और बेहतर करने का संकल्प। जो व्यवसाय में हैं ,उनके लिए भी नई शुरुआत। खास कर इस वर्ष जब हम  सब कोरोना के प्रकोप को पीछे छोड़ कर नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहें हैं यही सोचते हुए कि दो सालों का व्यावसायिक नुकसान को इस साल जरूर रिकवर करना पड़ेगा। जो कि पहली नौकरी ढूंढ रहें हैं उनकी भी उम्मीदें स्वाभाविक जीवन वापस आने की आशा पर टिकी हुई है। 

मेरा आज का लेख एक कदम पीछे हट कर भविष्य की ओर देखने का प्रयास है। कई अभिभावकों ने मुझे अनुरोध किया है उनके बच्चों के कैरियर चयन में उनकी मदत करने के लिए। मेरा प्रयास होगा कि मेरे इस लेख के माध्यम से उन बच्चों और उनके अभिभावकों का हौसला बढ़ा सकूँ जो पढ़ाई लिखाई में उतने तेज नहीं हैं या दिलचस्पी कम रखते हैं। मेरा तजुर्बा बोलता है कि ऐसे बच्चोँ की संख्या , पढ़ाई में अच्छे और दिलचस्पी रखने वाले बच्चों की तुलना में कई गुण ज़्यादा है। 

पहली बात जो हमें समझना पड़ेगा कि नौकरी और कैरियर में फर्क क्या है। साधारण भाषा में यह समझिए कि नौकरी में आपका वर्तमान आय मिलता है जब कि कैरियर में वर्तमान आय के अलावा भविष्य का रास्ता और अधिक जिम्मेवारी और अधिक आय का रास्ता भी सामने नज़र आता है। एक उदाहरण देता हूँ। कई युवा फूड डेलिवेरी का काम कर रहें हैं। यह एक नौकरी है। कैरियर नहीं है। इस सन्दर्भ में यह समझना जरूरी है कि किस इंडस्ट्री में कैरियर बन सकता है ,यह साधारण लोग कैसे समझें। इस को समझने का सर्वोत्तम उपाय है सरकार के प्रयासों और फोकस को समझना ,विश्लेषण करना और कौन सा कैरियर आते हुए  समय की जरूरतों से नाता या रिश्ता रखता है। एक और उपाय है हमारे खुद के जीवन यापन में परिवर्तन और नई दिशा को समझना। मैं इस दोनों उपायों पर आधारित तीन कैरियर चयन का ज़िक्र करूँगा। 

सरकार ने नई एडुकेशन पोलिसी का ऐलान किया है। इस पोलिसी का मूल उद्देश्य है कि शिक्षा के माध्यम से लोगों का ज़िन्दगी सुधारना है। और हर किस्म के नौकरी के लिए कोई ना कोई कौशल जरूरत है। स्कूल से उत्तीर्ण होने के बाद अगर कोई किसी कारण आगे पढ़ाई नहीं कर पाएगा उसको भी अपने काबिलियत के अनुसार कौशल सिखाया जायेगा जिसकी वजह से उसे नौकरी मिल सकती है और वह उस क्षेत्र में आगे कैरियर भी बना सकता है। अब सोचिए इस सन्दर्भ में कितने शिक्षक (वह भी तरह तरह के विषय के ) जरूरी होंगे जिनको नौकरी मिल सकती है। क्या ग्रेजुएशन करके कोई स्कूल मेंअध्यापक बन सकता है। शायद नहीं। शिक्षक बनने का तालीम लेना पड़ेगा। 

अब एक उदाहरण दूँगा हमारे ज़िन्दगी में आए बदलाव के सिलसिले में। कोरोना का सबसे बड़ा प्रभाव रहा है हमारे डिजिटल व्यवहार पर। हम ऑनलाइन काफी कुछ करने लगें हैं जो हम नहीं करते थे। इसका एक परिणाम है साइबर फ्रॉड। साइबर सिक्यूरिटी एक जबरदस्त कैरियर का संभावना प्रदान करता है। इसके कई सर्टिफिकेट प्रोग्राम को करने के बाद अच्छी नौकरी जरूर लग सकती है। डिजिटल मार्केटिंग का कैरियर एक और ऐसा कैरियर है। मजेदार बात यह है कि इन कैरियर के लिए अब तक आप क्या पढ़े हैं उतना मायने नहीं रखता है। 

पिछले कई सालों से इंजीनियरिंग कॉलेज में काफी सीट खाली जा रही हैं और इंजीनियरिंग करने के बाद भी सही नौकरी नहीं मिल रही है। ऐसा क्यों हो रहा है ? इंजीनियरिंग का कैरियर का भविष्य क्या नाजुक है ? कहाँ गलती हो रही है और कौन गलती कर रहा है ? इंजीनियरिंग तो हर किसी के बस की बात नहीं होती. बी ए बी Sc या बी com करने के बाद क्या कैरियर चॉइस है। १२ क्लास के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले का कैरियर चॉइस क्या हो सकता है ? बिना स्कूल उत्तीर्ण करने वाले का क्या कोई कैरियर चॉइस है ? या नहीं ? इन सब विषयों पर अग्रिम कुछ महीनों में चर्चा होगी। 

अगर आपका कोई प्रश्न है किसी भी कैरियर के विषय में , मुझे फेसबुक के माध्यम से बताइए। जरूर जवाब दूंगा। इतना समझ लीजिए कि हमारे देश में अगले पाँच वर्षों में कैरियर चॉइस की कोई कमी नहीं होगी।  हमे केवल सही कैरियर का चयन और उसकी तैयारी करनी पड़ेगी। 

सावधान रहिए। कोरोना का संक्रमण फिर बढ़ रहा है। फिर मिलेंगे अगले महीने आपके साथ। 

गुरुवार, 31 मार्च 2022

नमस्कार। नए वित्तीय साल मुबारक आप सब को। मेरा विश्वास है कि यह वित्तीय वर्ष व्यावसाय और अर्थनीति के लिए बेहतरीन होगा। शायद ऐसा कभी नहीं हुआ है। हमारे देश के लिए।  मेरा अनुमान है कि २०२५ तक हमारे देश का सबसे सुनहरा समय आने वाला है। इसका फायदा हर किसी को मिल सकता है। परन्तु इस मौके का इस्तेमाल करने के लिए हम सब को तैयारी करनी पड़ेगी। चाहे हम नौकरी कर रहें हों ,व्यवसाय में हो या विद्यार्थी हो , हमें बदलना पड़ेगा और अन्तर्जातिक स्टैण्डर्ड को हासिल करना होगा ,अपने कर्म क्षेत्र में। ऐसा सुयोग क्यों हमें प्राप्त हुआ है ? एक विलन के कारण। किसी भी हीरो को हीरोपंती के लिए विलन जरूरी है। जितना तगड़ा विलन उतना ज़्यादा हीरोपंती की ज़रुरत। 

यह कोरोना पिछले दो सालों का सबसे अप्रत्याशित और ढीट विलन था पूरे विश्व के लिए। परन्तु क्या हीरोपंती दिखाई है हर किसीने। रेकॉर्ड समय में वैक्सीन का अविष्कार, प्रोडक्शन और करोड़ों को वैक्सीन लगाना। लोकडाउन , अर्थनीति का तहस नहस ,वर्क फ्रॉम होम , बर्बादी ,मृत्यु , क्या नहीं देखा हम सभी ने ? क्या परिणाम हुआ इन सब का। 

हमारे जीने का तरीका और मकसद बदल गया। हमने नए अंदाज़ में जीना सीख लिया है। मास्क और सैनिटाइज़र हमारा एक अभिन्न अंग बन गया है। कितनी कम्पनियाँ इस व्यावसाय से लाभ कमाई है। तो क्या सीख है इस विलन और हीरो की कहानी में ?

हर प्रतिकूल स्थिति को हमें विलन के तरह देखना होगा। और अपने आपको हीरो बनने का मौका दिखाना पड़ेगा। हीरो बनने के लिए क्या गुण चाहिए ? निडर होना पड़ेगा। दिल के बजाय दिमाग से निर्णय लेना पड़ेगा। जल्द निर्णय लेना पड़ेगा। गलती हो सकती है। गलत होने के डर से निर्णय ना लेना और भी खतरनाक होता है। सफलता मिलेगा , यह विश्वास करना पड़ेगा। 

हिंदी फिल्मों में हीरो चाहे कितना भी पिट जाए ,हमें पता है कि अंत में जीत उसी की होगी। ज्यादातर फिल्मों में। परन्तु वास्तविक जीवन में ऐसा कोई गारंटी नहीं है। हीरोपंती में सफलता ,असफलता और निराशा , कुछ भी हो सकता है। इसी लिए हिंदी फिल्मों के बादशाह का एक डायलॉग बहुत मशहूर हुआ था -जीत कर हारने वाले को बाज़ीगर कहते हैं। 

खेल के मैदान में या ज़िन्दगी के सफर में ,जो जितना प्रतिकूल परिस्थितिओं पर विजय पाता है ,वह उतना बड़ा हीरो बन जाता है। आप भारतीय क्रिकेट के कप्तान कूल का उदाहरण लीजिए। हम उनसे क्या सीख सकते हैं। कितनी भी बड़ी विपत्ति हो ,विचलित ना होना। दिमाग को ठंडा रखना। अपनी काबिलियत पर भरोसा रखना। इस काबिलियत को बनाने और बरक़रार रखने के लिए कठिन परिश्रम करना। बदलते हुए हालात के लिए रणनीति बदलना और अपनों पर भरोसा रख कर उनको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास के लिए प्रोत्साहित करना। यही सफलता का मंत्र है जो कि हमें इस मौकों से भरी हुई भविष्य के लिए जरूरत है। 

नए वित्तीय वर्ष में आपको सफलता और कामयाबी मिले ,यही दुआ करूँगा ऊपर वाले के पास। अपने सेहत का ख्याल रखिए। सावधानी बरतिए। विलन अभी तक नाश नहीं हुआ है। हमें सुधरने का सलाह दीजिये ,फेसबुक के माध्यम से। इंतज़ार करूँगा। 

शुक्रवार, 4 मार्च 2022

नमस्कार। साल का सबसे रंगीन महीने में आप सब का स्वागत है। होली का त्यौहार। वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना। स्कूल के बच्चों का परीक्षा के कारण टेंशन। बच्चोँ से ज़्यादा अभिवावक को चिंता। और पूरे विश्व में युद्ध पर चर्चा। यह युद्ध विश्व के अर्थनीति को फिर अस्त व्यस्त करने पर तुली है। इस वक़्त हर देश को संयम और धैर्य के साथ कदम उठाना पड़ेगा। 

युद्ध क्यों और कब होता है ? इतिहास के पन्नों से हम यह समझते हैं कि ताली एक हाथ से नहीं बजती है। दोनों पक्षों में कई कारण होते हैं जो किसी भी युद्ध का बीज  बन जाता है। जड़ के निकलने के तुरंत अगर उसको उखाड़ कर ना फेकने पर एक युद्ध को होने से रोकना मुश्किल हो जाता है। युद्ध में कभी किसी पक्ष को विजय प्राप्त होता है। परन्तु जीतता कोई नहीं।  यही युद्ध का सबसे खतरनाक परिणाम है। 

विश्व युद्ध से हट कर हम गृह युद्ध पर थोड़ा विचार करना चाहते हैं आज के इस लेख में। किसी भी युद्ध का बीज होता है ,मतभेद। और जिनके बीच मतभेद , उनमे से एक या दोनों का ज़िद। और एक दूसरे का अन्य पक्ष के विचार या भावनाओं का कदर ना करना। 

परिवार के अंदर आपने अकसर देखा होगा कि दो सदस्यों के बीच ठंडे युद्ध की शुरुआत होती है अधिकार की वजह से। किसका क्या अधिकार है ,इसके विषय में उलझन या कंफ्यूशन। कई परिवार में मैंने यह देखा है बेटे के शादी के बात बेटे पर किसका अधिकार ज़्यादा है , माँ का या नई नई शादी हुई बीवी का ,यह साँस और बहू के बीच तनाव का कारण बन जाता है। माँ को ज़्यादा अधिकार नज़र आता है। उन्होंने जन्म दिया है ,पाल पोस कर बड़ा किया है, विवाह योग बनाया है। यह अधिकार कोई नहीं छीन सकता है। इस लिए बेटे को माँ की बात और आदेश को ज़्यादा महत्व देनी चाहिए। बीवी का सोचना है कि शादी के बाद बेटे को सही आँचल का चयन करना पड़ेगा। युद्ध का एक जरूरी बीज होता है अधिकार। 

दूसरी बात जो मैंने किसी भी युद्ध में देखा है वह है दो पक्षों में एक का दूसरे से खुद को बेहतर या ज़्यादा ताकतवर समझना। यह किसी को जीतने का साहस देता है तो किसी को ज़्यादा अधिकार का हक। और यही हमला बोलने का मनोबल देता है। अगर आप दूसरे विश्व युद्ध के मूल वजह को समझे तब आप देखिये गा कि एक इंसान ने अपने देशवासिओं को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ होने का विश्वास दिलाया और पूरे विश्व पर राज करने का सपना दिखाया। यह पावर या अपने शक्ति को बढ़ाने का एक नशा बन जाता है। सिकंदर या मुग़ल राजा का यही नशा था। अश्वमेध के घोड़े का कांसेप्ट ही यही था। 

तीसरी बात जो हमने युद्ध का कारण समझा है , वह है छल और कपट। रामायण या महाभारत की कहानिओं की शुरुआत होती है छल और कपट से। छल , एक दूसरे पर भरोसे के नींव को हिला देता है। एक बार भरोसा टूट जाता है तो युद्ध को रोकना कठिन हो जाता है। टेलीविज़न पर अधिकतर पारिवारिक ड्रामा में छल , कपट और चतुराई अत्यधिक मात्रा दिखने को मिलता है। 

किसी भी युद्ध को शुरू ना होने के लिए दोनों पक्षों के बीच समय पर ,सठिक वार्तालाप होना जरूरी है और इसका कोई विकल्प नहीं है। राजनीती और उसके साथ जुड़े हुए स्वार्थ अवष्य इस समझ बुझ को अक्सर ठेस पहुंचाते हैं। परन्तु हिँसा और शक्ति का प्रदर्शन किसी को मदत नहीं करता है। इस विषय कोई दो राय नहीं है। 

मैं केवल यही उम्मीद और प्रार्थना के साथ जी रहा हूँ कि इस वक़्त जो युद्ध हर किसी के चर्चे का विषय है , बातचीत और कूटनीति के जरिये जल्द समाप्त हो जाए। इसी में सब का मंगल है। कोरोना के साथ युद्ध भी अभी ख़तम नहीं हुआ है। ज़िन्दगी ही एक युद्ध है। हम सबको संभल कर चलते रहना है। 

शनिवार, 5 फ़रवरी 2022

नमस्कार। उम्मीद  करता हूँ कि नया साल आपके लिए ठीक चल रहा है। परिस्थिति इतनी जल्दी बदल जाती है कि खुद को सँभालने का मौका नहीं मिलता है कभी कभी। पिछले महीने मैंने भारतीय क्रिकेट टीम की प्रशंसा की थी उनके जीत पर। उसके बाद क्या हुआ ? हमारी टीम हर एक मैच हार गई। क्यों। हमारे विपक्ष की टीम ने हम से सीख कर बाज़ी मार ली। उन्होंने वही किया जिसने हमारी टीम को जीत दिलाई थी -अनुशाषन ,धैर्य और संकल्प। किसने जीत दिलाई ? खिलाड़िओं ने। उनमे एक मोटिवेशन आया जीतने का। और इसी मोटिवेशन ने उन्हें जीतने में सहायता की। मेरे ३५ साल के काम करने के तजुर्बे के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि मोटिवेशन या प्रेरणा ही इंसान को आगे बढ़ाने का एक मात्र ईंधन है। हमने कई ऐसी कहानियाँ सुनी है जहाँ प्रतिकूल परिस्थितिओं के बावजूद लोगों ने सफलता पाई है। इनका संकल्प और ज़िद इस सफलता का मूल कारण है। तो मोटिवेशन का परिभाषा क्या है ? अलग अलग लोग अपना परिभाषा देते हैं। 

मेरे लिए मोटिवेशन खुद को दिया हुआ कारण या वजह है जो कि हमारा व्यवहार या कार्य को तय करती है। परिवार का उदाहरण ले लीजिए। साँस भी कभी बहु थी मोटिवेशन का एक जबरदस्त मिसाल है। हम कुछ खरीदना चाहते हैं -उदाहरण स्वरुप एक मोबाइल फोन। हमारे पास काफी सारे विकल्प हैं। परन्तु हम किसी एक को खरीदते हैं। और हमने क्यों इसे चुना इसके लिए खुद को कारण देते हैं। और यही कारण है हमारा मोटिवेशन इस चयन का। 

अकसर माता -पिता अपने बच्चों के जरिये वह हासिल करना चाहते हैं जिनकी चाहत उनमे थी ,परन्तु किसी वजह से वह उस सपने को पूरा नहीं कर पाए। कोई पिता इंजीनियर बनने से वंचित रह गया इस लिए बच्चों को इंजीनियर बनने के लिए प्रोतसाहित करता है। सही है। परन्तु बच्चा क्या चाहता है यह इससे ज्यादा जरूरी है। पिता का मोटिवेशन उसका मोटिवेशन नहीं भी हो सकता है। और इसी विषय में कई अभिभावक गलती कर बैठते हैं। अपना मोटिवेशन जबरदस्ती बच्चों पर ठोप देते हैं। 

जिंदगी रिश्तों का सफर है। रिश्ते ज़िन्दगी को जीने लायक बनाते हैं। रिश्ते बनाना कठिन है। उसका परवरिष करना कहीं ज़्यादा कठिन होता है। और रिश्ते तोडना सबसे आसान। रिश्ते बनाने और आगे बढ़ाने में मोटिवेशन का अहम भूमिका है। अगर हम अपना मोटिवेशन और जिसके साथ हम रिश्ता आगे बढ़ाना चाहते हैं ,उनका मोटिवेशन समझ कर दोनों के मोटिवेशन को सवांरें तो रिश्ते मजबूत होते हैं और आगे बढ़ते हैं। आपने अगर थ्री इडियट्स फिल्म देखी हो तो शायद आप मेरी मेसेज को और समझ पायेंगे। 

कैसे हम किसी दूसरे को मोटीवेट कर सकते हैं ? सहज उपाय है उनके मोटिवेशन को समझ कर उनको प्रेरीत करना। आप ने शायद अपने ही परिवार में दो बच्चों में अलग मोटिवेशन देखा होगा। कोई बच्चा पढ़ाई में दिलचस्पी रखता है और दूसरा पढ़ाई से दूर रहना चाहता है। अधिकतर माता -पिता तुलना कर बैठते हैं अपने ही बच्चों में। जो नहीं पढ़ना चाहता है उसको हमेशा दूसरे का उदाहरण देते हैं। इससे कोई फायदा नहीं होता है। केवल नुकसान। जो बच्चा पढ़ने में दिलचस्पी नहीं रखता है उसके मोटिवेशन को समझने का प्रयत्न नहीं करते हैं। यह एक गलती है -माता -पिता का। 

फरवरी वैलेंटाइन का महीना है। आप लोग जो मेरे साथ हर महीने जुड़ते हो इस लेख के माध्यम से , उन सबको मेरा श्रद्धा भरा हुआ प्यार कहूँगा। आपका जीवन मंगलमय हो। इसी का कामना करते हुए आप सबको हैप्पी वैलेंटाइन डे के लिए अग्रिम शुभेच्छा। मुलाकात होगी अगले महीने इस वित्तीय वर्ष के आखरी महीने में। अपने सेहत क्या ख्याल रखिए। कोरोना अभी भी मौजूद है। 



शुक्रवार, 31 दिसंबर 2021

नमस्कार। २०२२ के लिए आपको बधाई। दुआ है कि यह साल हम सब के लिए बेहतर हो। २०२१ कुछ के लिए अच्छा था और अधिक के लिए उतना अच्छा नहीं रहा। परन्तु हमारे क्रिकेट टीम का टेस्ट मैच में प्रदर्शन बेहतरीन रहा २०२१ साल के दौरान। हमने ऑस्ट्रेलिया में जीत के साथ शुरू किया ,इंग्लैंड में विजय प्राप्त किया जून के महीने में और कुछ दिनों पहले हमने दक्षिण अफ्रीका में टेस्ट मैच जीता। पूरी टीम को बधाई इस जीत के लिए। आज का लेख है मैन ऑफ़ दा मैच के इंटरव्यू से प्रेरित है। इन्होंने प्रथम पाड़ी में शतक बनाया था। उन्होंने तीन कारन बताएँ उनकी सफलता के लिए। मैं समझता हूँ कि यही तीन सीख को अपना कर हम इस वायरस के प्रकोप से अपने आप को सुरक्षित रख सकते हैं। 

पहली सीख है धैर्य। भारतीय टीम के कोच ने एक ही सलाह दी थी। गेंदबाज कितना ही प्रलोभित करे , आपको स्ट्रोक तभी मारना है जब कि आप एकदम निश्चित हो कि आपका गेंद पर पूर्ण नियंत्रण रहेगा। अन्यथा आपको डिफेन्स पर ध्यान देना पड़ेगा और अपने विकेट्स का रक्षा करना पड़ेगा। वायरस के प्रकोप से बचने के लिए हमें इसी तरह धैर्य का साथ लेना पड़ेगा। मैंने अधिक से अधिक लोगों को देखा है कि उन्होंने हाल छोड़ दिया है और जो नहीं करना चाहिए वो कर बैठते हैं जिनके कारण वायरस के प्रकोप में आ जाते हैं। कुछ शहरों में लोग नए साल के सेलिब्रेशन की वजह से घर से बाहर निकल कर ऐसी जगह जा रहें हैं जहाँ अत्यधिक भीड़ है लोगों का। क्या होता अगर हम इस साल यह नहीं करते ? 

दूसरी सीख है अनुशाषन। इस बल्लेबाज़ को कोच का निर्देश था कि अगर आप क्रीज़ पर समय बिता पाओगे तो रन अपने आप बन जायेंगे। गेंदबाज़ को अपना विकेट मत गिफ्ट करो। उनको आपको आउट करने के लिए मेहनत करने दो। अपना बल्ला अपने शरीर से दूर मत ले जाओ चाहे कितना भी प्रलोभन हो। हमारे लिए मास्क का प्रयोग यही अनुशाषन डिमांड करता है। किसी भी हालत में आप बिना मास्क दूसरों के सामने नहीं जा सकते हैं। हमने देखा है कि अधिकतर अपने मास्क को अपने नाक और मुँह के नीचे पहने रहते हैं। फिर मास्क पहेनने का फायदा क्या होगा। मैंने ऐसे कई लोगों से बातचीत की और पूछा कि आप ऐसा क्यों करते हो। उनका जवाब था कि मास्क पहन कर साँस लेने में असुविधा होती है। मेरा कहना है कि अगर आप वायरस के चपेट में आ गयें तो सास लेना काफी मुश्किल हो जायेगा। 

तीसरी सीख है अपने कर्तव्य का पालन करना जो कि टीम के हित में है। अगर टीम का हर सदस्य अपनी जिम्मेवारी से वाकिफ रहें और अपना कर्तव्य निभाएँ तो टीम के जीतने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप सोचो हर कोई एक ही टीम के सदस्य हैं जो कि वायरस जैसे प्रतिद्वंदी से लड़ाई कर रही है। उसे हराना ही पड़ेगा। क्योंकि इसी में हम सबका मंगल है। तो इस द्वन्द को जीतने के लिए हमारे व्यक्तिगत कर्त्वय क्या हैं ? हम सबको पता है। मास्क पहन कर घर के बाहर निकलना , सामाजिक दूरी बरक़रार रखना जब हम अन्य लोगों से मिलते हैं ,वैक्सीन के दोनों डोज़ को ले लेना ,अफवाओं को नजरअंदाज करना और अपने आप को सुरक्षित रखना। जरा सोचिये अगर हर इंसान अपने आप को सुरक्षित रखे तो वायरस करेगा क्या। तभी हमारी जीत होगी। 

२०२२ के शुरुआत में हमें और भी सावधानी बरतनी पड़ेगी क्योंकि वायरस नई वैरिएंट के साथ हमें अटैक किया है। हमें धैर्य ,अनुशाषन के साथ अपने कर्तव्य निभाना पड़ेगा। इसी में अपना मंगल है। दुआ करते हैं कि हम सभी का २०२२ बेहतर रहे और हम सब स्वस्थ और खुश रह सकें। 

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2021

जाते जाते नहीं गया। जाने का कोई इरादा भी नहीं दिख रहा है। मैं कोरोना वायरस का बात कर रहा हूँ। नमस्कार सब ठीक चल रहा था ,सही दिशा की ओर दुनिया चल रही थी ,हम सब वायरस के साथ कॉन्फिडेंस के साथ जीने लगे थे और एक नया स्ट्रेन का उदय हुआ दक्षिण अफ्रीका में। बस ,फिर हम और पूरी दुनिया का रूह बदल गया और हम फिर दुविधा में पर गए कि अब क्या करना। 

दुविधा इस लेख का मुख्य विषय है। हम दुविधा में क्यों उलझ जाते हैं ? क्यूँकि हम निर्णय नहीं ले सकते हैं। हम क्यों निर्णय ले सकते हैं ? कई कारण हो सकते हैं -हम निर्णय लेना नहीं चाहते हैं या हमारे पास जितने तथ्य हैं वह निर्णय लेने के लिए पर्याप्त नहीं है या हमारे पास निर्णय लेने लायक तजुर्बा नहीं है या हम ऐसे परिस्थिति का पहली बार सामना कर रहें हैं जैसा कि इस वायरस के प्रकोप के शुरुआत में हुआ था। हर कोई अपने अंदाज़ और अनुभव के अनुसार अपनी टिप्पणी दे रहा था। जैसा कि अभी हो रहा है ,इस नए स्ट्रेन के विषय में। उम्मीद करता हूँ कि आप सभी मेरे विचारोँ से सहमत होंगे। आपके विचार अगर भिन्न हो तो मूझे अवश्य फेसबुक के माध्यम से बताएँ। 

दुविधा से निकलने के लिए आपको करना क्या है ? तीन 'डी ' का प्रयोग। डिटर्मिनेशन , डिसिप्लिन और डेटा। दृढ़ता  ,अनुशाषन और तथ्य। मैंने अपने लिए इन तीन 'डी 'का सहारा लिया है दुविधा को सुलझाने के लिए। 

डिटर्मिनेशन या दृढ़ता पहला कदम है क्योंकि हम जब तक खुद के साथ संकल्प ना कर लेते हैं कि हम जिस दुविधा में उलझे हुए हैं ,उसका समाधान हमें ढूंढ कर निकालना पड़ेगा ,तब तक हम अगला कदम नहीं उठा सकते हैं। इस सन्दर्भ में मेरी एक ही सलाह है -अपना संकल्प बनाने के लिए इतना समय ना लीजिए कि पानी सर के ऊपर चढ़ जाए।ताकि आपका निर्णय मजबूरी की वजह से नहीं होना चाहिए। क्योंकि मजबूरी की वजह से लिए हुए निर्णय अकसर गलत होते हैं। एक उदाहरण देता हूँ। आपके ऑफिस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है , यह आप समझ रहे हो। आप दुविधा में हो कि आपको नयी नौकरी ढूंढनी चाहिए या नहीं। आप सोचते रह जाते हो और अचानक एक दिन खबर मिलती है कि आपके शहर में आपका ऑफिस बंद किया जा रहा है। फिर क्या होगा आप जरूर समझ रहे हो। जितनी जल्दी हो सके दुविधा का समाधान ढूंढ निकालिए। इसी में मंगल है। 

डिसिप्लिन या अनुशाषन। दुविधा को सुलझाने के लिए यह अति आवश्यक है। इस सन्दर्भ में अनुशाषन का तात्पर्य क्या है ? एक बार जब आपने ठान ली कि आप दुविधा का समाधान निकाल लोगे , तब आपका पहला कदम होगा खुद के लिए एक डेडलाइन तय करना कि कब तक में आप समाधान निकाल लोगे। यह आपके लिए एक गंतव्य या मंजिल का स्वरुप है। फिर आपको तय करना पड़ेगा कि मंजिल तक पहुँचने के लिए आपका सफर कैसा होगा और इस सफर के दौरान कौन से पड़ाव आयेंगे और किस समय पर आयेंगे। एक और अनुशाषन जो बहुत जरूरी होता है -आपके सलाहकार का चयन। हमें सलाह लेनी परती है। जितने सलाहकार होंगे उतना आपका कन्फ्यूज़न बढ़ेगा। एक या दो से अधिक सलाहकार जरूरी नहीं है। फिर पिछले उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए हम इस कदम का प्रयोग सीखेंगे। कब तक हमें नयी नौकरी चाहिए हमारा मंजिल बन जाएगा। इसके लिए अपना बायोडाटा बनाना , कंपनी तक पहुँचना ,दोस्तों या परिचित लोगों से सहायता लेना ,इंटरव्यू की तैयारी करना -सब पड़ाव इस सफर के। हर पड़ाव के लिए डेडलाइन ठीक करना आवश्यक है। 

डेटा या तथ्य। दुविधा को सुलझाने के लिए उचित डेटा का विश्लेषण करना अति आवश्यक है। अगर इस सिलसिले में हम अपने उदाहरण पर वापस चले जाएँ तो पहला डेटा जो जुगाड़ करके समझना पड़ेगा कि क्यों हमारी कंपनी की परिस्थिति डावाँडोल है। क्या हम लोगों से सुन रहें हैं ? या आँकड़े बता रहें हैं कि सब ठीक नहीं है ? क्या आपकी कंपनी का प्रोब्लेम है या जिस इंडस्ट्री में आपकी कंपनी है उसका प्रोब्लेम है ? वायरस के कारन जैसे ट्रेवल और टूरिज्म का व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया था। आप जिस पेशे में हो , क्या आपको अपने शहर में नौकरी मिलेगी या आपको दूसरे शहर में शिफ्ट करना पड़ेगा ? इस तरह के डेटा के आधार पर आपका निर्णय लेना आसान होता है। 

आशा करता हूँ कि मेरे तजुर्बे पर आधारित इस लेख से आपको फायदा होगा। नए वर्ष मेरा लेख होगा अपने जीवन साथी के चयन में दुविधा को आप कैसे सुलझा सकते हैं? अभिभावकों के लिए भी यह लेख फायदेमंद होगा। तब तक अपना ख्याल रखिए ,वायरस के विषय में अफवाहों पर ध्यान ना दें। मास्क का प्रयोग कीजिये और दूरी बरक़रार रखिए। वायरस आपको कुछ नहीं कर पाएगा। यह प्रमाणित हो चुका है। मुलाकात होगी फिर नए साल २०२२ में। नए साल की अग्रिम शुभकामनायें स्वीकार कीजिए। 

 

गुरुवार, 28 अक्टूबर 2021

नमस्कार। अग्रिम शुभेच्छा दीपावली के लिए।  सावधानी के साथ  त्यौहार का आनंद लीजियेगा। आपकी ख़ुशी दूसरों पर भारी ना पड़े इसका ख्याल रखियेगा। दिवाली खुशियों का त्यौहार है। एक नई शुरुआत का प्रतीक है। आप क्या नया करना चाहते हैं अपनी ज़िन्दगी में ? आपका निर्णय या चयन कि आप क्या नया शुरू करेंगे दो सोच पर निर्धारित कीजिए। क्या आपको खुश करेगा और जिसे आप लंबे समय तक सहायता करेगा। मैंने अपने लिए तीन परिवर्तन करने का निर्णय लिया है। आपके लिए पेश कर रहा हूँ शायद आपके सोच को प्रभावित करे। 

हर इंसान अपनी ज़िन्दगी में इस वक़्त किसी ना किसी मुकाम पर खड़ा है। यह मुकाम उसके उम्र और पेशा निर्धारित करता है। मैं ऐसे मुकाम पर मौजूद हूँ जहाँ मुझे औरों के लिए अपना तजुर्बा और ज्ञान बाँटने का समय आ गया है। मेरा विश्वास है कि इसके जरिये मैं कुछ लोगों के जीवन और कैरियर को प्रभावित कर पाउँगा। और यह इस बदलते हुए समय के लिए अति आवश्यक है। मेरे इस प्रयास का कोई भी फायदा उठा सकता है। अगर कोई अपने पेशेवर जीवन में तरक्की करना चाहता है तो उसे अपने पेशेवर रिश्तों को और मज़बूत बनाना है। पेशेवर रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशल होता है अपने पेशे के उपयुक्त व्यवहार। व्यवहार के तीन स्तंभ होते हैं -आपकी भाषा , आपकी शारीरिक भाषा और आपकी वेषभूषा -इन तीन स्तंभ पर विराज करता है आपके पेशे का ज्ञान और कौशल। ख्याल रखिएगा कि आपके रिश्ते को बनाने और आगे बढ़ाने में आपका सबसे महत्वपूर्ण कौशल है आपका कम्युनिकेशन का कौशल। कम्युनिकेशन में आपके इस्तेमाल किये हुए शब्दों का असर दूसरों पर मात्र सात प्रतिशत है। जहाँ कि आपके शारीरिक भाषा का अवदान पचपन प्रतिशत है। हमने आपके लिए कम्युनिकेशन सीखने के लिए ट्रेनिंग का मूल्य एक फिल्म देखने के खर्चे से कम कर दिया है। हिंदी भाषा में आपको ट्रेनिंग मिलेगी। आप कहीं से भी इस ट्रेनिंग का फायदा उठा सकते हो। हमारा मकसद है कि अगर कोई खुद की तरक्की करना चाहे तो उसके लिए उसे भारी कीमत ना चुकानी पड़े। हमारे फेसबुक पर नज़र रखिये अगर आपको इस विषय में दिलचस्पी हो। 

मुझे अपने इस इरादे में सफल होने के लिए अपने आप को एक विषय में सुधारना पड़ेगा। अपने समय का बेहतर उपयोग करना पड़ेगा। मैं इस विषय में सचेतन हूँ। मैंने अपनी डायरी में अपने समय के इस्तेमाल की नॉटिंग शुरू कर दिया है। कहाँ मेरा समय का अपचय हो रहा है , कहाँ मैं जरूरत से कम समय दे रहा हूँ , कहाँ मुझे अपनी एफिशिएंसी बढ़ानी होगी ,कौन सा काम मैं खुद ना करके दूसरोँ से करवा सकता हूँ , मैं काम के दौरान कितनी बार और कितने समय का ब्रेक ले रहा हूँ , इस नोटिंग के वजह से एकदम साफ़ दिख रहा है कि मैं कहाँ गलत कर रहा हूँ। अपना टाइम मैनेजमेंट सुधारना मेरे लिए इस कारन जरूरी है ताकि मैं समय निकाल सकूँ आपके लिए आवश्यक ट्रेनिंग बना सकूँ जहाँ मेरे तजुर्बा का फायदा आपको कम से कम पैसों के विनिमय में मिलें। और आपके पेशेवर जीवन में आपको सफलता मिले और आप अपनी कैरियर में अग्रसर हो सके। 

आज नवंबर का पहला दिन है। हमने सीखा है कि किसी भी बदलाव को सफलता पूर्वक करने के लिए एक महीने तक उस बदलाव को बरक़रार रखना पड़ेगा। ऐसा करने से परिवर्तन स्वभाव बन जाता है। मैं वादा करता हूँ कि मैंने जो परिवर्तन अपने लिए सोचे हैं , पूरे तीस दिनों के लिए लगातार करूँगा ताकि मेरा अपना टाइम मैनेजमेंट बेहतर बन जाए और मैं अपने ज़िन्दगी में और नई चीज़ों को सीखने में अपना समय दे सँकू। 

क्या आप भी अपने लिए कुछ परिवर्तन का प्रयास करेंगे ? मुझे जरूर इत्तिला कीजियेगा फेसबुक के माध्यम से। आप सबको एक सुरक्षित और आनंदमय दिवाली की अग्रिम बधाई।