मंगलवार, 29 सितंबर 2026

नमस्कार।  अक्टूबर के महीने में आपका स्वागत। इस महीने हमारे राष्ट्र पिता बापू जी को मेरा श्रद्धा भरा प्रणाम।
इसी महीने हमारे एक और पूजनीय इंसान का जन्मदिन है।  
15 अक्टूबर  ‘विश्व छात्र दिवस’ (World Students' Day) के हैसियत से मनाया जाता है , जो हमारे देश के मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जन्मदिन है । डॉ. कलाम बच्चों और युवाओं से कितना प्यार करते थे, यह बात किसी से छुपी नहीं है। उनका दृढ़ विश्वास था कि छात्र ही देश का भविष्य हैं और शिक्षा ही प्रगति का एकमात्र रास्ता है। लेकिन आज इस खास मौके पर, मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता हूँ—आखिर एक ‘स्टूडेंट’ या छात्र होता कौन है?
जब हम ‘छात्र’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में स्कूल की यूनिफॉर्म पहने, पीठ पर भारी बस्ता टांगे या कॉलेज कैंपस में घूमते युवाओं की तस्वीर उभरती है। हां, वे निश्चित रूप से छात्र हैं। लेकिन क्या छात्र की परिभाषा सिर्फ किसी शैक्षणिक संस्थान में दाखिला लेने या कोई डिग्री हासिल करने तक ही सीमित है? बिल्कुल नहीं!
सच तो यह है कि जो लोग आज किसी स्कूल या कॉलेज में नहीं जा रहे हैं, वे भी छात्र हैं। डॉ. कलाम खुद मानते थे कि सीखना कभी बंद नहीं होना चाहिए। इस लिहाज से देखा जाए, तो हम सभी जीवनभर के लिए छात्र हैं। छात्र की सही परिभाषा बहुत सरल और व्यापक है—हर वह व्यक्ति जो सक्रिय रूप से कुछ नया सीखने की कोशिश कर रहा है, वह छात्र है। चाहे आप एक गृहिणी हों जो कोई नई रेसिपी सीख रही हैं, एक बिजनेसमैन हों जो बाजार के नए तरीकों को समझ रहे हैं, या एक बुजुर्ग हों जो स्मार्टफोन चलाना सीख रहे हैं—हम सब हर पल एक स्टूडेंट की भूमिका में ही होते हैं।
आज की दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। तकनीक, काम करने के तरीके और समाज हर रोज नया रूप ले रहे हैं। ऐसे में अगर हमने यह सोचकर सीखना बंद कर दिया कि ‘हमारी पढ़ाई तो पूरी हो चुकी है’, तो हम बहुत पीछे छूट जाएंगे। इस तेज रफ्तार दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का इकलौता तरीका है—‘लाइफ-लॉन्ग लर्निंग’ यानी जीवनभर सीखते रहना।
अब सवाल यह उठता है कि जब हमारे पास कोई स्कूल या टीचर नहीं है, तो हम सीखें कैसे? मैं तीन तरीके के जरिये सीखता हूँ :
  1. देखना और समझना (Observe): हमारे आसपास की दुनिया सीखने का सबसे बड़ा जरिया है। जब आप लोगों को काम करते देखते हैं, प्रकृति को बदलते देखते हैं, या किसी समस्या का समाधान होते देखते हैं, तो आप अनजाने में ही बहुत कुछ सीख रहे होते हैं। अपनी आंखें खुली रखिए और हर छोटी-बड़ी घटना से सीखिए।
  2. सुनना (Listen): एक अच्छा छात्र वही बन सकता है जो एक अच्छा श्रोता हो। दूसरों के अनुभवों, उनकी कहानियों और उनके विचारों को ध्यान से सुनिए। जब हम सुनते हैं, तो हम दूसरों के जीवनभर के ज्ञान को चंद मिनटों में हासिल कर लेते हैं।
  3. पूछना (Ask): कभी भी सवाल पूछने से कतराइए मत। सवाल पूछना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदार होने की निशानी है। जब तक आप ‘क्यों’, ‘कैसे’ और ‘क्या’ नहीं पूछेंगे, तब तक ज्ञान के नए दरवाजे नहीं खुलेंगे।
इन तीनों मंत्रों की नींव टिकी है एक बेहद खूबसूरत शब्द पर—‘जिज्ञासा’ (Curiosity)। जिज्ञासा ही सीखने की असली चाबी है। याद कीजिए जब हम छोटे बच्चे थे, तो हर बात पर सवाल पूछते थे। हमारे अंदर का वह बच्चा आज भी कहीं न कहीं जिंदा है। वह बच्चा आज भी जिज्ञासु है, नया देखने और जानने के लिए बेताब है। बस जरूरत इस बात की है कि हम अपने अंदर के उस बच्चे को कभी मरने न दें, उसे लगातार फलने-फूलने का मौका दें।
एक प्रसिद्द हिंदी गाना है -दिल तो बच्चा है जी -दिल व्याकुल होता है और जानने के लिए। केवल दिमाग का साथ चाहिए उसको सीखने के लिए। त्योहारों का समय आ गया है। हमारे आस पास काफी हलचल रहेगा। लोगों के व्यवहार को देखिये ,सोचिये ,समझिये -देखिएगा की आपने काफी नयी सीख पाई है। खुश रहिए। ज़िन्दगी का भरपूर आनंद लीजिये। सीखते रहिये। स्टूडेंट बने रहने में ही हम सब का भविष्य है। 

 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें