शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

 

नया साल, नए संकल्प: इच्छा नहीं, दिशा चुनिए

नमस्कार। २०२६ आपके और अपनों के लिए आनंदमय हो यही दुआ है 
हर नया साल अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है। कैलेंडर बदलते ही हम भी खुद को थोड़ा बेहतर बनाने का सपना देखने लगते हैं।
इसी सपने का नाम है—न्यू ईयर रेज़ोल्यूशन, यानी नया साल का संकल्प। लेकिन सवाल यह है कि संकल्प वास्तव में होता क्या है?
क्या यह सिर्फ़ इच्छा है, या फिर जीवन को दिशा देने का एक सचेत निर्णय?

संकल्प इच्छा से अलग होता है। इच्छा कहती है—“काश ऐसा हो जाए”, जबकि संकल्प कहता है—“मैं इसके लिए कुछ बदलूँगा।”
मेरी समझ में  संकल्प कोई भारी-भरकम प्रतिज्ञा नहीं, बल्कि अपने जीवन के साथ की गई एक ईमानदार बातचीत है।
यह वह छोटा-सा फैसला है जो हमें भीड़ से अलग नहीं, बल्कि खुद के करीब ले जाता है।

अब प्रश्न आता है कि संकल्प चुनें कैसे? एक अच्छा संकल्प कुछ कसौटियों पर खरा उतरता है।
पहली कसौटी—वह आपका होना चाहिए, समाज या सोशल मीडिया का नहीं।
दूसरी—वह स्पष्ट होना चाहिए; “स्वस्थ रहूँगा” से बेहतर है “हर दिन 20 मिनट पैदल चलूँगा।”
तीसरी—वह यथार्थवादी हो। बहुत ऊँची छलांग अक्सर गिरा देती है।
और चौथी—वह आपके जीवन के किसी अर्थपूर्ण हिस्से को बेहतर बनाए, न कि सिर्फ़ आपकी टू-डू लिस्ट बढ़ाए।

फिर भी हम में से अधिकांश लोग फरवरी आते-आते अपने संकल्प भूल क्यों जाते हैं?
इसका कारण इच्छाशक्ति की कमी नहीं, बल्कि समझ की कमी होती है।
हम अक्सर एक साथ बहुत कुछ बदलना चाहते हैं।
हम परिणाम पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन प्रक्रिया से दोस्ती नहीं करते।
कभी-कभी हम दूसरों से तुलना करने लगते हैं, और कभी एक छोटी चूक को पूरी हार मान लेते हैं।
सबसे बड़ा कारण यह है कि हम खुद से बहुत कठोर भाषा में बात करते हैं—“मैं कभी नहीं कर पाऊँगा।”

तो फिर संकल्प पर टिके कैसे रहें? इसका उत्तर भी सरल है, लेकिन गहरा।
पहला—संकल्प को आदत में बदलने की कोशिश करें, बोझ में नहीं।
दूसरा—प्रगति को मापें, पर खुद को जज न करें।
तीसरा—अपने संकल्प को किसी अपने के साथ साझा करें, ताकि जवाबदेही बने।
और चौथा—हर सप्ताह खुद से पूछें: “क्या यह संकल्प अभी भी मेरे लिए मायने रखता है?”
जरूरत पड़े तो उसमें सुधार करना असफलता नहीं, समझदारी है।

याद रखिए, संकल्प का उद्देश्य परफेक्ट बनना नहीं, बल्कि थोड़ा बेहतर बनना है।
नया साल कोई जादुई बटन नहीं है, लेकिन यह एक अच्छा रिमाइंडर ज़रूर है कि जीवन को ऑटो-पायलट पर नहीं छोड़ना चाहिए।
अगर इस साल आप सिर्फ़ एक ही संकल्प लें—खुद के प्रति थोड़ा अधिक सजग, थोड़ा अधिक दयालु बनने का—तो शायद वही सबसे बड़ा संकल्प होगा।

नया साल मुबारक हो।

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