बुधवार, 9 मार्च 2016

"बड़े बड़े देशों में छोटी छोटी बातें होती रहती हैं। "कभी कभी कुछ जीतने के लिए कुछ हारना पड़ता है और कुछ हार कर जीतने वाले को बाज़ीगर कहते हैं। "हम शरीफ क्या हुए पूरी दुनिया ही बदमाश बन गयी। "
हमारे बॉलीवुड के बादशाह ने इन डायलॉग्स को अमर बना दिया। शब्दों का चयन और उनके बोलने के अंदाज़ ने इन डायलॉग्स को इतना स्मरणीय बनाया। कोई भारी भरकम शब्दों का प्रयोग नहीं है किसी भी डायलाग  में। सुनने वालों को उनकी बातों को समझने में कोई असुविधा नहीं होंगी। तीन 'V' का कमाल है -Verbal , Vocal और Visual
किसी भी कम्युनिकेशन का इम्पैक्ट इन तीन 'V ' पर निर्भर करता है। इन पर थोड़ा चर्चा करते हैं।
Verbal - यह है शब्दों का चयन और प्रयोग। आपके चुने हुए शब्द सुनने वालों को दुःख या ठेस पहुंचाता है या सुकून ? एक उदाहरण लीजिये। अगर कोई आपको झूठ बोल रहा है और आपको उसको यह बताना चाहते हो  तो आप दो तरह से बोल सकते हो। एक -"आप झूठ बोल रहे हो। " दो -"आप सच नहीं बोल रहे हो। "एक ही सन्देश है , सुनने का प्रभाव अलग होगा।
प्रभाव शब्द से एक प्रश्न दिमाग में आया है। क्या आप यह बता सकते हैं की कम्युनिकेशन ग्रहण करने वाले पर शब्दों का प्रभाव या इम्पैक्ट कितना प्रतिशत होता है ? शत प्रतिशत? पचास प्रतिशत? या उससे ज़्यादा या कम ? सही जवाब सुन कर आप अचम्भित हो जायेंगे। ....... केवल ७ प्रतिशत !जी हाँ , आपने सही पढ़ा है। केवल सात प्रतिशत। जब हम किसीको हाथ के इशारे से अपने पास बुलाते हैं और वह व्यक्ति हमारे पास आ जाता है तो शब्दों का तो प्रयोग ही नहीं होता है !
इसी हाथ हिलाकर पुकारने के ऊपर और थोड़ा गौर फरमाये। आपने ख्याल किया होगा कि आप अपना हाथ उतने ज़ोर से हिलाते हैं जितना जल्दी आप उनको आपके पास आने का सन्देश पहुँचाना चाहते हैं। वह वयक्ति आपके हाथ के इशारे पर जल्दी या समय लेकर आपके पास पहुँचता है। आपका कम्युनिकेशन केवल Visual माध्यम से है।
Visual अर्थात जो दिखता है। कितना प्रतिशत है इसका प्रभाव? ५५  प्रतिशत। सबसे अधिक। इसके अंतर्गत काफी चीजें आती हैं। सहज भाषा में आपका वेशभूषा; खड़े होने का या बैठने का अंदाज; चेहरे पर जो दिखता है आपके कम्युनिकेशन का  ५५  % इम्पैक्ट बनाता है। शोले में आपको वह दृश्य याद है? जय भैंस पर सवार होकर मस्ती करते हुए अचानक राधा को उसकी ओर देखते हुए देख लेता है। राधा मुस्कुराती है और जय लज्जा के कारन भैंस से तुरंत उतर जाता है। अपने चेहरे के जरिये जय जिस तरह अपनी चाहत का ज़िक्र करता है वह visual कम्युनिकेशन का एक बेहतरीन मिसाल है। आप चाहो तो अपने याददाश्त को ताज़ा करने के लिए एक बार you tube में फिर इस सीन को देख सकते हो। ज़रूर देखिये। बहुत कुछ सीखिएगा।
अपने बाहों को फैलाकर हमारे बादशाह एक निमंत्रण सा करते हैं उनमे समां जाने के लिए। इसी visual कम्युनिकेशन  के ज़रिये उन्होंने कितने के दिलों में अपना स्थान बना लिया है। ८ से ८० तक के उम्र का। यह बाहें फैलाना उनका एक सिग्नेचर बन गया है।
हम वापस चले जाते हैं इस लेख के शुरू के डायलॉग पर। अनुरोध करूँगा एक बार फिर देख लीजिये। राहुल, विकी और  काली को देखिये और सुनिए। उनके बोलने के अंदाज़ पर गौर कीजिये। यही अंदाज़ कम्युनिकेशन का vocal अंश है जिस पर कम्युनिकेशन का ३८ %इम्पैक्ट है।
किसी गलती के लिए माफी माँगते वक़्त आप किस अंदाज़ में सॉरी बोलते हैं आपके प्रायश्चित के गहराई को प्रदर्शित करता है। इस संदर्भ में मै एक बहुत आवश्यक तथ्य का ज़िक्र करना चाहता हूँ। मैंने यह देखा है कि कुछ लोग अपने कम्युनिकेशन का अंदाज़  किससे कम्यूनिकेट कर रहें हैं ,उसके ऊपर निर्धारित करते हैं। यह ठीक नहीं है। बच्चा ,बूढ़ा ,अमीर ,गरीब ,मर्द ,औरत ,मालिक ,नौकर -आप किसके साथ बात कर रहें हैं उस पर आप तय नहीं कर सकते हैं कि आपके बोलने का अंदाज़ क्या होगा।
हर इंसान चाहता है कि उसके साथ लोग इज्जत के साथ पेश आएं। इज्जत के साथ कम्यूनिकेट कीजिये; लोग आपके साथ इज्जत से पेश आएंगे। 'इज्जत पाने के लिए ,इज्जत करना पड़ेगा ' शायद भविष्य में किसी फिल्म में आप बादशाह से सुनिएगा। इंतज़ार मत कीजिये, तब तक। शुरू कर दीजिये कम्युनिकेशन का ५५ -३८ -७ का फॉर्मूला। फिर देखिये आपका ब्रैंड कैसे तेजी से रिश्ता बनाता जाता है। याद है ना -ब्रैंड का परिभाषा ?रिश्ता , चॉइस का।
आनंद लीजिये अपने कम्युनिकेशन के क्षमता का। मुझे जरूर लिखिएगा आपके कम्युनिकेशन के सफलता के विषय में। मुझे बेहद ख़ुशी होगी। इंतज़ार करूँगा।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस लेख की उपकारीता के विषय में जितना भी कहें कम होगा

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  2. आपकी इस लेख की उपकारीता के विषय में जितना भी कहें कम होगा

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